Thursday, December 20, 2012

Fwd: दुआ गौहर रज़ा



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From: Roma <romasnb@gmail.com>



with some corrections in hindi


आइये हाथ उठायें  हम भी, हम जिन्हें रस्म-ए -दुआ याद नहीं,
हम जिन्हें सोज़-ए -मुहोब्बत के सिवा, कोई बुत कोइ खुदा  याद नहीं
"दुआ" फैज़ अहमद फैज़ 

दुआ 

काश  यह बेटियां बिगड़ जाये 
इतना बिगड़े के ये  बिफर जाएँ  
उन पे बिफरे जो तीर-ओ-तेशा लिए  
राह में बुन रहे हैं  दार  ओ रसन  
और हर आज़माइश - ए -दार -ओ - रसन  
इनको रस्ते  की धूल लगने लगे  


काश ऐसा हो अपने चेहरे से  
आंचलो को झटक के सब से कहें  
ज़ुल्म की हद जो तुम ने खेंची  थी  
उस को पीछे कभी का छोड़ चुके  


काश चेहरे से खौफ का ये हिजाब  
यक-ब-यक इस तरह पिघल जाये  
तमतमा उट्ठे  ये  रुख़ ए रोशन  
दिल का हर तार टूटने सा लगे  

काश ऐसा हो सहमी आँखों में  
कहर की बिजलियाँ कड़क  उट्ठें 
और मांगे ये  सारी दुनिया से 
एक-एक कर के हर गुनाह का हिसाब 
वोह गुनाह जो कभी किये ही नहीं 
और उनका भी जो ज़रूरी है  

काश ऐसा हो मेरे दिल की कसक  
इनके नाज़ुक लबों से फूट पड़े  


शाहीन धाडा और रिनू श्रीनिवासन के नाम जिन्हें शिव सेना का हमला सहना पड़ा 
गौहर राजा 
18.12.2012
दिल्ली 


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