Monday, July 1, 2013

Rajiv Lochan Sah shared Sameer Raturi's photo. यह एक बहुत जरूरी और सामयिक शुरूआत है. इस राहत के साथ क्षति के आँकलन का कार्य भी होता रहे. अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग समूह इसे करें, क्योंकि इस बार की आपदा बहुत बड़े भूगोल में फैली है.

यह एक बहुत जरूरी और सामयिक शुरूआत है. इस राहत के साथ क्षति के आँकलन का कार्य भी होता रहे. अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग समूह इसे करें, क्योंकि इस बार की आपदा बहुत बड़े भूगोल में फैली है.
आपदा के तहत कई गाँव व् कई परिवार अपनी नैसर्गिक अस्तित्व को खो चूका है, कई लोग बेघर होकर अपने करीबियों के लौटने की कल्पना में कहीं न कहीं आश्रय लिया हुए हैं, कुछ संस्था व सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा आंकलन किये जाने पर एक वृहद व दर्द भरा दृश्य दिखने को मिला, अन्वाडी गाँव के २२ बच्चे के लापता के साथ साथ जाल तल्ला व जाल मल्ला के करीब ७० बच्चे अभी तक घर नहीं पहुंचे हैं, माना यह जा रहा है की यह बच्चे नदी की प्रवाह में बह गए हों, जहाँ चंद्रापुरी मार्किट का नामो निशाँ ही नहीं वहीँ चंद्रापुरी गाँव का अस्तित्व ही मिट गया, भले ही जान की कोई हानि नहीं हुई लेकिन सारा गाँव नदी की आघोष में चला गया है, सर में छत नहीं, आने वाले समय में बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था, अपनी आजीविका की खोज, इत्यादि सभी सवाल उनके सामने खड़े हैं लेकिन हादसे से खौफजदा यह लोग अपनी मनोदशा के आगे विवश है, आंकलन के दौरान एक गाँव के २२ पुरुष के गायब हो जाने से पूरे गाँव की महिलाएं अपने को विधवा मान चुकी हैं, अपनी आजीविका को लेकर इस गाँव के पुरुष कार्य के लिए केदारनाथ, रामबाड़ा या अन्य जगह जाया करते थे लेकिन इस बार का जाना वापसी का मार्ग न दिखा सका, यही नहीं कई बच्चे अनाथ व कई युवा जिनकी आने वाले समय में शादी तय थी अपने माँ – पिता के खोए के बाद अपने जीवन को कैसे संवार सके, उसपे बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो चूका है
उखीमठ व गुप्तकाशी घाटी की तरफ मचे इस विनाशकारी तांडव को देख एक सशक्त प्रयास की जरुरत है जहाँ सारे संघठन मिलके आपदा राहत के लिए दीर्धकालीन योजना पर कार्य करें, सबसे अपील की जाती है की दीर्धकालीन राहत हेतु गाँव को पुनर्जीवित व ग्रामीणों की आजीविका को खड़े करने हेतु अपने योगदान सुनिश्चित करें, ६ माह के इस कार्यक्रम में विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया है: तत्कालीन और दीर्धकालीन राहत :

तत्कालीन राहत :
1. चूँकि बरसात के फिर से शुरु हने से घाटियों में बाड़ का खतरा फिर मंडराने लगा है और जान माल का नुकसान होने का भी खतरा है अत: बेघर हुए ग्रामीण व खतरे के साए में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर लाने के विचार किया जाय I
2. विचारानुसार किसी एक सुरक्षित स्थान को राहत शिविर या रिलीफ कैंप में बदलने का विचार किया गया है जहाँ उन्हें पूरी बरसात में रखा जाए और वहां उनके खाने पीने, दवाई, व कपडे दिए जाये I केदार घाटी के दो स्थान गुप्तकाशी घाटी व ऊखीमठ घाटी में सब – रिलीफ कैंप रखे जाने का सुझाव है, जो दोनों घाटी के आपदाग्रस्त गाँव में काम करेंगे या राहत कार्य करेंगे
3. तत्कालीन राहत के दौरान जन नायक, जनकवि, प्रेरणा श्रोत बुद्दिजीवी, समाज सेवी, विभिन्न संघटन के संघर्ष शील व्यक्ति ग्रामीणों के साथ उनके मनोबल को बढाने का प्रयास करेंगे
4. केंद्र बिंदु श्रीनगर को चुना गया है, यह स्थान संभावित स्थानों में सबसे उत्तम इसलिए माना गया क्यूँकी बरसात के किसी दौर में भी वो संपर्क में रहेगा और वहां संसाधनों को पहुचने में कोई दिक्कत नहीं होगी I चिकित्सा, से लेकर सारी सुविधायें वहां उपलब्ध हो सकती हैं I
दीर्धकालीन राहत :
रिलीफ कैंप के दौरान दो आपदाग्रस्त गाँव को चिन्हित कर गाँव को गोद लिया जायेगा जिसे एक आइडियल विलेज बनाने का प्रयास किया जाएगा, यह गाँव बिजली के लिए सोलर एनर्जी को वैकल्पिक रूप में तैयार किया जाएगा, पर्यावरण दृष्टीकोण के मद्देनजर इकोलॉजी व इकॉनमी का निर्माण किया जाएगा, स्थायी रोजगार के लिए पहाड़ के संसाधनों के अनुसार साधन खड़े किये जाने का प्रयास किया जाएगा, पर्यावरण को बढावा जो दे सके उस तरह के स्थायी रोजगार पर भी जोर दिया जाएगा
1. चूँकि ग्रामीणों को असली राहत उनके अपने स्थानीय गाँव के पुनर्जीवित होने पर ही मिलेगी अत: बरसात के बाद गाँव में काम करने पर विचार किया गया है I
2. कुछ बुरी तरह प्रभावित गाँव को गोद लेके उनके पुनर्जीवित होने तक उनकी आजीविका, खाने और रहने का काम किया जाएगा
3. वहां के नागरिकों के हिसाब से उनकी आजीविका के अनुसार उनकी आजीविका को खड़े करने में मदद करेंगे
4. जब तक सरकार ग्रामीणों को घर बनाके देगी तब तक उन लोगों के लिए टिन शेड बना दिए जायेगे जहाँ वो रह सकें,
5. सामूहिक रूप से वहां के लोगों के लिए खाने की व्यवस्था और आपस में मदद करके गाँव को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा I
6. इस कार्य के लिए स्थानीय जनता का सहयोग बखूबी मिलेगा I
प्रमुख बातें :
1. सहायता स्वरुप सारे संघठनो से उम्मीद की जाती है वो इस कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दे
2. सहयता स्वरुप आर्थिक सहायता के बदले संसाधनों से सहायता करें
3. राहत शिविर में आप अपनी उपस्तिथी भी दर्ज करायें
4. ज्यादातर गाँव वासियों को संसाधनों से राहत पहुचायी जायेगी
5. ग्रामीण इस भयावह मंजर को देख बहुत भयभीत है अत: उनको प्रेरित करना अति दुर्लभ कार्य है अत: हमे खुद उनके लिए काम करना हो
निम्नलिखित संसाधनों की आवश्यकता हेतु अपील :
1. टेंट / शेड : १०० व्यक्तियों के रहने हेतु ५ शेड, व १० व्यक्तियों के रहने हेतु १०० टेंट/शेड
2. सोलर लालटेन :
3. सोलर लाइट : दो गाँव को बिजली उर्जा के वैकल्पिक रूप देने के लिए सोलर इक्विपमेंट
4. बरतन किचन के कार्य के लिए (बनाने व खाने हेतु दोनों)
5. ब्लीचिंग पाउडर
6. कपडे : सभी कपडे नए हो व pre-autumn seasonके हो, ज्यादातर लार्ज साइज़ के हो
7. कैर्री बैग : जिसमे आंशिक प्रभावित गाँव के लोग आपदा राहत का सामान ले जा सके
8. जमीन में बैठने के लिए मैट
9. Beddings : कम्बल, चद्दर, गद्दे, इत्यादि
10. दवाइयां :
11. छाते (umbrella)
12. सिलिंडर के जगह अगर खाने पकाने के लिए कोई और तरीके हो तो वो भी सहायतार्थ उपलब्ध करायें
13. पैक्ड मिल्क
14. राशन लम्बे समय तक निरंतर उपलब्ध कराएं
सामाजिक संगठन जिनके सहयोग से यह कार्यक्रम किया जा रहा है :
1. डीन- स्कूल ऑफ़ सोशल साइंस, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्व-विद्यालय, श्रीनगर संपर्क: प्रोफ. जे.पी.पचौरी
2. पर्वतीय विकास शोध केंद्र, श्रीनगर, संपर्क: डॉ. अरविन्द दरमोड़ा - 9411358378
3. रोटरी क्लब, श्रीनगर संपर्क: धनेश उनियाल : 9412079049
4. हिमालय साहित्य कला परिषद्, श्रीनगर, संपर्क: डॉ. उमा मैंठानी : 7579428846/9411599020
5. उत्तराखंड सोसाइटी फॉर नार्थ अमेरिकन, (U.S.A)
6. प्रमोद राघव, निस्वार्थ कदम - (U.S.A)
7. उत्तराखंड कौथिक ग्रुप, नयी दिल्ली: संपर्क – भरत बिष्ट - 8285481303
8. सल्ट समाज- दिल्ली
9. हिमालयन ड्रीमज ग्रुप, दिल्ली
10. उत्तराखंड जन जागृति संसथान, खाड़ी : संपर्क: अरण्य रंजन- 9412964003
11. क्रिएटिव उत्तराखंड, दिल्ली
12. उत्तराखंड विकास पार्टी – ऋषिकेश, संपर्क: मुजीब नैथानी – 9897133989, नरेन्द्र नेगी-9897496120
13. अल्मोड़ा ग्राम कमिटी, दिल्ली
14. सार्थक प्रयास, दिल्ली
15. हमर उत्तराखंड परिषद्, दिल्ली
16. उत्तराखंड चिंतन, दिल्ली
17. मेरु उत्तराखंड, दिल्ली
18. सस्टेनेबल एप्रोच ऑफ़ डेवलपमेंट फॉर आल (SADA), दिल्ली संपर्क : रमेश मुमुक्षु - 9810610400, बसंत पाण्डेय - 7579132181, डॉ. सुनेश शर्मा- 9456578242
19. प्रथा, ऋषिकेश – संपर्क: प्रभा जोशी : 9411753031, हरी दत्त जोशी: 9410103188
निवेदक :
(हिमालय बचाओ आन्दोलन)
राजीव नयन बहुगुणा: 9456502861, समीर रतूड़ी : 9536010510, जगदम्बा प्रसाद रतूड़ी: 9412007059, चंद्रशेखर करगेती: 9359933346, दीप पाठक: 9410939421, हितेश पाठक: 8699023548, हरीश बडथ्वाल: 9412029305, अनिल स्वामी – 9760922194, कृष्णा नन्द मैंठानी: 9456578209 ,
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उत्तराखंड में आई आपदा के मद्देनजर भाकपा(माले) की राज्य स्थायी समिति की आपात बैठक -2 9 जून को हल्द्वानी में हुई।बैठक के बाद आज-30 जून को हल्द्वानी में प्रेस वार्ता में जारी हैण्ड आउट :


  • उत्तराखंड में आई आपदा के मद्देनजर भाकपा(माले) की राज्य स्थायी समिति की आपात बैठक -2 9 जून को हल्द्वानी में हुई।बैठक के बाद आज-30 जून को हल्द्वानी में प्रेस वार्ता में जारी हैण्ड आउट :
    • भाकपा(माले) प्रदेश में प्राकृतिक आपदा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देती है.पार्टी आपदा पीड़ितों की सहायता के लिए देश भर में तथा प्रदेश में भी राहत सामग्री जमा करने का अभियान चला रही है.प्रदेश में जो क्षेत्र आपदा प्रभावित नहीं हैं,उनमें यह अभियान 15 जुलाई तक चलेगा.आपदा प्रभावित क्षेत्रों में,जब तक आवश्यकता होगी पार्टी कार्यकर्ता राहत कार्यों में लगे रहेंगे.भाकपा(माले) यह मांग करती है कि केंद्र सरकार इस आपदा को तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित करे.
    • भाकपा(माले) की दो टीमों ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया.पिथौरागढ़ जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पार्टी के राज्य कमेटी सदस्य और पिथौरागढ़ जिला सचिव कामरेड जगत मर्तोलिया के नेतृत्व में दल गया जिसने आपदा प्रभावित क्षेत्रों के हालात का जायजा लिया और राहत सामग्री भी वितरित की.गढ़वाल में पार्टी के गढ़वाल सचिव कामरेड इन्द्रेश मैखुरी के नेतृत्व में दल आपदा प्रभावित क्षेत्रों में गया.
    • आपदा प्रभावित क्षेत्रों के इस दौरे से साफ़ हुआ कि राज्य सरकार का आपदा प्रबंधन एकदम ढीला-ढाला था और आपदा के प्रति सरकार का नजरिया भी बेहद शिथिल नजर आया.सरकार ने सुमगढ़,उत्तरकाशी,उखीमठ जैसे हादसों से कोई सबक नहीं सीखा और संभावित आपदाओं को लेकर सरकार की तैयारी बेहद लचर थी.बादल फटने जैसी घटनाओं के पूर्वानुमान के आधुनिक उपकरण उपलब्द्ध हैं पर राज्य सरकार ने इन्हें लगाने का इंतजाम ही नहीं किया.भारी बारिश की पूर्व उद्घोषणा मौसम विभाग द्वारा की गयी थी पर उससे भी लोगों को आगाह नहीं किया गया.
    • 2010 में पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के आपदा प्रबंधन पर टिपण्णी करते हुए भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक(सी.ए.जी.-कैग) की रिपोर्ट में कड़ी टिपण्णी की गयी थी.इस रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य सरकार ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक भी बैठक आयोजित नहीं की.भाजपा सरकार के इस लापरवाहीपूर्ण और गैरजिम्मेदाराना रवैये को ही विजय बहुगुणा सरकार ने जारी रखा.राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक ना किया जाने के बारे में मुख्यमंत्री की टिपण्णी थी कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक करने से आपदा कुछ कम थोड़े हो जाती! मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की उक्त टिपण्णी से आपदाओं से निपटने के प्रति राज्य सरकार की गंभीरता को समझा जा सकता है. 
    • चूँकि उत्तराखंड का अधिकाँश हिस्सा,जिसमें ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल है,आपदा ग्रस्त है,इसलिए भाकपा(माले) यह मांग करती है कि प्रदेश में इस वर्ष होने वाले पंचायत चुनावों को स्थगित किया जाए.
    • सरकारी स्तर पर चलने वाले राहत कार्यों की निगरानी करने के लिए भाकपा(माले) राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों की निगरानी कमेटियां बनाएगी ताकि राहत की लूट ना हो तथा नेता-नौकरशाह-दलालों का गठजोड़ ना फूले-फले. 
    • उत्तराखंड में आयी इस आपदा ने उत्तराखंड में पिछले तेरह साल से चल रहे जन विरोधी,विनाशकारी विकास के मॉडल पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.यह प्राकृतिक आपदा थी.लेकिन जलविद्युत परियोजना निर्माण में किये गए विस्फोट और मलबा नदी में डाले जाना,बेहिसाब खनन और अनियोजित शहरीकरण ने इस आपदा की विभीषिका को कई गुणा बढ़ा दिया.
    • कुछ पर्यावरणवादी इस आपदा को इको-सेंसिटिव ज़ोन की वकालत करने के मौके के रूप में प्रयोग करना चाहते हैं.भाकपा(माले) का यह मानना है कि इको-सेंसिटिव ज़ोन वन क्षेत्रों के निवासी आम लोगों की बेदखली का सबब बनेगा.साथ ही जिस तरह इसमें होटल-रिजॉर्ट बनाने को विनियमित श्रेणी में रखा गया है,उससे यह साफ़ है कि भविष्य में वनों से बड़ी पूँजी के मुनाफे की भूमिका तैयार की जा रही है.
    • वर्तमान प्राकृतिक आपदा से पहले भी सैकड़ों गांव आपदा की दृष्टि से संवेदनशील श्रेणी में थे,जिनके पुनर्वास की आवश्यकता स्वयं सरकारें भी स्वीकार करती रही हैं.लेकिन उत्तराखंड में विस्थापन और पुनर्वास की कोई ठोस नीति नहीं हैं.ऐसी पुनर्वास नीति की आवश्यकता है जो कि आम जनता को केंद्र में रख कर बनायीं जाए.
    • आपदा की विभीषिका,विकास के जनविरोधी मॉडल,सरकारों के उपेक्षापूर्ण रवैये,ठोस विस्थापन एवं पुनर्वास नीति जैसे तमाम सवालों पर भाकपा(माले) एक पुस्तिका का प्रकाशन करेगी.साथ ही अगस्त माह में पिथौरागढ़ एवं श्रीनगर(गढ़वाल) में जन सम्मलेन (कन्वेंशन) भी आयोजित किये जायेंगे तथा अक्टूबर माह तक इन सवालों पर हस्तक्षेप के लिए देहरादून में भी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. 

    राजेंद्र प्रथोली,
    उत्तराखंड राज्य सचिव,भाकपा(माले),
    Mo. 9456188623

Himanshu Kumar हर शहरी को इत्तिला दी जाती है की अब मुल्क आज़ाद है और हम सब अब सभ्य हो चुके हैं इसलिए अब मेहनत करने वालों को गरीब रहना होगा और जो गद्दों और कुर्सियों में आराम से पसरे रहेंगे वो अब से सम्माननीय और अमीर होंगे

हर शहरी को इत्तिला दी जाती है की अब मुल्क आज़ाद है 
और हम सब अब सभ्य हो चुके हैं 
इसलिए अब मेहनत करने वालों को गरीब रहना होगा 
और जो गद्दों और कुर्सियों में आराम से पसरे रहेंगे 
वो अब से सम्माननीय और अमीर होंगे 

और इस नई आज़ादी का एक नियम ये भी होगा की 
मुल्क की ज़मीन पानी पहाड़ और जंगल पर 
सबका बराबर हक नहीं होगा 
जमीनों पर सिर्फ वही कब्ज़ा कर पायेंगे जिसकी तरफ सिपाही होंगे 

मुल्क में पैदा होने वाले हर गरीब बच्चे को रहने के लिए एक मकान का कोई हक नहीं होगा 
बल्कि कानून अब ये बनाया गया है की 
बड़े बंगले में रहने वाले साहब के हुक्म से 
गरीब बच्चे की झोंपड़ी सरकारी बुलडोज़र द्वारा गिरा दी जायेगी 

मुल्क के आम शहरी को ये भी इत्तिला दी जाती है 
की सरकार के मोटे सिपाही जब भी चाहे अपनी पसंद की किसी भी औरत को थाने के भीतर ले जाकर उसके जिस्म में पत्थर भरने का खेल खेल सकने के लिए आज़ाद होंगे 
और पुलिस के सिपाहियों के औरतों के जिस्म से खेलने के इस खेल के मामले में संसद और अदालत कोई भी दखलन्दाजी नहीं करेंगे 

इस तरह आज से मुल्क के सिपाही, आरामखोर सेठ, अदालतें और संसद आज़ाद घोषित किये जाते हैं 
और ये भी ऐलान किया जाता है की 
मोटे सेठों अदालत संसद और पुलिस वालों की 
इस आज़ादी पर जो भी शहरी सवाल उठाएगा 
उसे आज़ाद मुल्क का ये निजाम सरकश और मुल्क का गद्द्दार मानेगा 
और इस आज़ादी पर सवाल उठाने वाले वाले को उसकी हैसियत के मुताबिक 
उम्रकैद या सजाए मौत दी जायेगी 

इसलिए आज के बाद इस आज़ाद मुल्क के हर शहरी के लिए ये लाजिम होगा की वो 
संसद पुलिस और अदालत को हमेशा इज्ज़त की निगाह से देखे
और हमेशा अदब से अपना सर इनकी शान में झुकाए रखे 

आप सब को सरकार की तरफ से आजादी की बहुत बहुत बधाइयां .
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कब मिलेगा छुटकारा ?

कब मिलेगा छुटकारा ?

उत्तराखंड की जनता हमेषा बदरी-केदार के नाम पर छली गयी है । उसे बताया गया है कि तुम देवभूमि के रहने वाले हो । सीधे -साधे, ईमानदार । आप लोगों पर प्रभु की कृपा है । बोलान्दा बदरी के नाम से राजा ने सदियों तक राज किया । इसी बोलने वाले बदरी ने अपने लिये अलग टिहरी बना दिया । शोषण का एक टापू । वही बोलान्दा बदरी खोलता है आपके चार धामों के किवाड । वही बोलान्दा बदरी जिसने 1930 में तिलाड़ी में भून दिया था अपनी जनता को । उस जनता को जो अपना हक मांग रही थी । जब टिहरी बांध बना तो यह जिन्दा बदरी भाग गया था । एक संस्कृति की बलि देकर रास्ता खोला पहाड़ को तबाह करने का । यह जिन्दा बदरी लगातार जीतता रहा टिहरी से । भगवान के आगे किसकी चलती है । जनता की भी नहीं चली । अब भी जिन्दा बदरी के वंषजों का राज है । 

वास्तव में आज जिन्दा और मरे दोनों बदरी को हम लोग खोज रहे हैं । गुजरात, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान देश के सब हिस्सों से आ रहे हैं सरकारों के प्रतिनिधी अपनी-अपनी जनता को ढूढने के लिये । ठीक भी है इन राज्यों के पास भगवान नहीं हैं । वहां की व्यवस्था आदमी देखता है । हमारे उत्तरा- खण्ड के कण-कण में भगवान का वास है इसलिये अभी दबे गांवों को देखने की जरूरत नहीं है ? देहरादून की सरकार जिनको बचा सकती है बचा ले । बांकी दूर दराज के गांवों का तो बदरी-केदार ही मालिक हैं । उसी की कृपा पर तो सदियों से यहाँ के लोग जी रहे हैं । 

अगर चारधाम यात्रा का समय नहीं होता तो सबसे पहुचने वाला मीडीया भी वहाँ नहीं होता और न ही वहाँ के समाचार माल बनते । पिछले तीन वर्षों में भी तो आपदा आयी थी, ज्यादा नुकसान थोड़ी हुआ था । सिपर्फ एक छोटी सी घटना हुयी थी बागेश्वर के सुमगढ़ में 18 बच्चे ही तो मरे थे । 3800 गांवों में भूस्खलन हुआ था । उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग और अलमोड़ा में कुल दो-तीन सौ लोग मरे थे । गांवों की तबाही तो हर साल ही होती है । आज तक तो बदरी-केदार के भरोसे थे, इस बार केदारनाथ भी नहीं रहे । अब तो एक ही आश है जल्दी ही देहरादून में बैठने वाले भगवानों से भी छुटकार मिले तो कुछ बात बने...

साभार : Charu Tiwari
 — with Rajiv Nayan Bahuguna and 19 others.

इमरजेंसी ने इंदिरा गाँधी को तानाशाह बनाया

CORDIALLY INVITES YOU TO ATTEND A SEMINER ON----- Caste and Class in Bengal :-Politics of Partition Revisited

MAHAPRAN JOGENDRA NATH MANDAL SMRITI RAKSHA COMMITTEE
INTERNATIONAL SEMINAR CUM WORKSHOP 

CORDIALLY INVITES YOU TO ATTEND A SEMINER ON-----
Caste and Class in Bengal :-Politics of Partition Revisited
To be held on July 20,2013 / Saturday at 4 P.M at----
INDIAN ASSOCIATION HALL ( 62 B,B,Ganguly Street ) Kolkata-700012

PROGRAMME
Inauguration===
4 PM-To-4-30 PM Welcome Address by Jyotirmoy Mondal.
Address by Chief Guest Dr. Nazrul Islam,IPS
4-30-To 6-30 PM
Speakers---------- Professor Debi Chatterjee (Reetd )
Dr.Dwaipayan Sen ( Amherst College. USA
Dr.Anasua Basu Roy Chaudhury ( Calcutta Research Group )
Sarbani Bandyopadhyay ( St.Xaviers Collage )

CHAIR-------------- Dr.Pashupati Prasad Mahato ( Asiatic Society Kolkata )
VOTE OF THANKS-- 
Santu Halder ( Secetary of Mohapran Jogendra Nath Smriti Raksha Committee ).
SON OF MOHAPRAN JOGENDRA NATH MONDAL SRI JAGADISH MONDALWILL BE PRESENT AT THE BACK STAGE.

बंगाल को आत्मघाती हिंसा से बचायेगा कौन?