Tuesday, January 1, 2013

मौजूदा कानून अगर न्याय नहीं दिला सकता तो और सख्त कानून किस काम का​?समता और सामाजिक न्याय के बिना क्या कानून का राज संभव है ?और लिंगभेद का क्या?

मौजूदा कानून अगर न्याय नहीं दिला सकता तो और सख्त कानून किस काम का​?समता और सामाजिक न्याय के बिना क्या कानून का राज संभव है ?और लिंगभेद का क्या?
​​
​पलाश विश्वास

मौजूदा कानून अगर न्याय नहीं दिला सकता तो और सख्त कानून किस काम का​?दिल्ली गैंगरेप के खिलाफ देशभर में गुस्सा भड़कने के बावजूद बलात्कार की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है।समाचार चैनलों पर बलात्कार की खबरें लगातार चल रही है। अचानक से ऐसी खबरों की बाढ़ आ गयी है।  पश्चिम बंगाल से लेकर गुजरात तक यानी देश के चप्पे – चप्पे से दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के नए – नए मामले सामने आ रहे हैं।  

देश के तमाम राज्यों से रिश्तों को तारतार कर होने वाली बलात्कार की घटनाओं की खबरें हैं। कहीं बाप ने बेटी तो कहीं भाई ने बहन को हवस का शिकार बनाया है। यूपी में नाबालिग छात्रा से गैंगरेप हुआ है तो बंगाल में महिला की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई। के कर्नाटक, मध्यप्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों में बलात्कार की शर्मनाक घटनाएं सामने आई जबकि गुजरात में ढाई साल की एक बच्ची के साथ उसके मामा ने कथित तौर पर बलात्कार कर उसे झाड़ियों में फेंक दिया, जिससे मंगलवार को उसकी मौत हो गई। दिल्ली गैंगरेप पीड़िता की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई कि देश के कई अन्य हिस्सों से रेप की सात घटनाएं सामने आई हैं। पंजाब में चार, बिहार, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश में रेप की एक-एक घटनाओं से देश का सिर शर्म से एक बार फिर झुक गया है।

समता और सामाजिक न्याय के बिना क्या कानून का राज संभव है?

और लिंगभेद का क्या?

महिलाओं के प्रति अपराध के खिलाफ केंद्र सरकार सख्त कानून बनाने जा रही है। इससे ऐसे दरिंदों को कानून के दायरे में लाकर सख्त सजा मिल सके। इसके लिए जस्टिस वर्मा कमेटी बनाई गई है। क्या नये कानून से महिलाएं सचमुच सुरक्षित हो जायेंगी?दिल्ली गैंग रेप के बाद सेक्शुअल असॉल्ट के मामले में सख्त कानून के लिए बढ़ते दबाव के बीच सरकार हरकत में आ गई है। विपक्षी पार्टियों द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की जा रही है। ऐसे में सरकार रेपिस्टों के खिलाफ सख्त कानून के लिए बजट सेशन से पहले ही अध्यादेश ला सकती है। सरकार इस पर गंभीरता से काम भी कर रही है।

देश भर में जो पुरुष स्त्री की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, मोमबत्तियां जला रहे हैं, कानून बदलने के लिए आंदोलन करने सड़क पर उतर रहे हैं, ​​पितृसत्तात्मक मनुसमृति व्यवस्था बदलने के लिए वे कितने तैयार हैं? अपने घर और समाज में स्त्री को क्या वे आजाद कर देंगे?

दिल्ली पुलिस ने सामूहिक बलात्कार कांड में एक हजार पन्नों का आरोप पत्र तैयार किया है। यह गुरुवार को कोर्ट में पेश होगा। सख्त कानून की मांग पर सरकार ने कहा संसद के सत्र पर फैसला वर्मा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद होगा।गौरतलब है कि 16 दिसंबर को दिल्ली में चलती बस में छह लोगों ने 23 साल की लड़की से सामूहिक बलात्कार करने के साथ ही क्रूरता की सारी हदें पार कर उस हमला भी किया था। करीब एक पखवाड़े तक जूझने के बाद छात्रा ने शनिवार तड़के सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में दम तोड़ दिया। पिछले दिनों राष्ट्रीय राजधानी में हुए सामूहिक बलात्कार कांड के विरोध में प्रदर्शनों का सिलसिला अब भी जारी है। देश की बेटी की को इंसाफ दिलाने के लिए 15 दिनों से प्रदर्शन और आंदोलन का दौर जारी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी एक आंदोलन चल रहा है। बलात्कारियों को फांसी की मांग को लेकर दो शख्स भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इनमें से एक 9 दिनों से अनशन पर है और उसकी हालत लगातार बिगड़ रही है लेकिन सरकार इनकी सुध नहीं ले रही। दरअसल नौ दिन गुजर चुके हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे राजेश गंगवार की हालत अब बिगड़ने लगी है। भूख और प्यास का असर दिखने लगा है। जिस्म जवाब देने लगा है लेकिन जज्बा लाजवाब है। बरेली का ये बेटा हिंदुस्तान की तमाम बेटियों के हक की लड़ाई लड़ रहा है। पीड़ित लड़की की अस्थियां मंगलवार को उत्तर प्रदेश में उनके पैतृक जिले बलिया में गंगा में प्रवाहित कर दी गईं।  

एफडीआई के खिलाफ जिहादी राजनीति का तमाशा अभी खत्म हुआ नहीं है। कालाधन के खिलाफ अराजनीतिक धर्मयुद्ध तो जारी है ही। अब बलात्कारियों को नपुंसक बना देने और उन्हें पांसी देने पर सर्वसम्मति बन रही है। सवाल है कि किस किस को फांसी देंगे? आप सवाल है कि जो बलात्कार के मामलों में सचमुच निरपराध होंगे और झूठे मामले में जिन्हें फंसाया जा रहा है, न्याय के बाजार में पहुंच और पैसा न हो पाने से क्या वे ही नयी व्यवस्था के सबसे बड़े शिकार नहीं होंगे? आपसी दुश्मनी के मामलों में अक्सर रेप केस डालने का जो रिवाज है, उसका क्या करेंगे? क्या पूंजी और सत्ता को नपुंसक बनाने का कोई रसायन ईजाद हो गया है?महिलाएं खुशफहमी में हैं। महिला आरक्षण विधेयक अभी लंबित हैं और संसद की पुरुषसत्ता किसी भी हाल में इसे पास कराने को तैयार नहीं है। जब अल्पमत सरकार बाजार के हित में आर्थिक सुधार की जनविरोधी नरसंहार एजंडा को लागू करने के लिए एक के बाद एक विधेयक संसद में पास करा लेती है, तो क्यों रुक जाता है महिलाओं को आरक्षण का बिल और अनुसूचितों को पदोन्नति का विधेयक?

इस देश में नारी को देवा कहा जाता है। धार्मिक आस्था के मुताबिक हर सिर देवीमाता  के चरणों में झुक जाता है। इस देश में इंदिरा गांधी जैसी​ ​ नेता न सिर्फ भारत की प्रधानमंत्री रही, विश्वनेतृत्व में भी शामिल रही आजीवन। अब भी सत्ता पक्ष की नेता सोनिया गांदी और विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज है। जिस दिल्ली को बलात्कार की राजधानी कहा जाता है, वहां मुख्यमंत्री शीला दीक्षित है।मायावती, जयललिता और ममता बनर्जी जैसी नेता हैं।​​ पर महिलाओं का सशक्तीकरण क्यों नहीं हुआ क्यों देश भर में महिलाओं पर अत्याचार बढ़ते ही जा रहे हैं उपभोक्ता संस्कृति में बाजार की चीज बनाकर सख्त कानून से अगर स्त्री को हम देहमुक्त करना चाहते हैं, तो वह समाज यथार्थ से भिन्न परिसर है। जब भोग ही एकमात्र सामाजिक मूल्य है और हर हाथ में मोबाइल और इंटरनेट से जुड़ा हर पुरुष हों, स्त्री आखेट की मानसिकता कला, साहित्य, संस्कृति और धर्म की बुनियाद हो, तो सख्त कानून से दो चार बलात्कारियों को सजा हो जायेगी ,जैसे कि अब तय है कि दिल्ली बलात्कारकांड के खलनायकों के बचने की कोई सूरत नहीं है, लेकिन इससे न बलात्कार रुकनेवाला है और न देहव्यापार। नहीं रुकेगा बाजार और सत्ता के हित में स्त्रीदेह का अबाध इस्तेमाल, जो अबाध पूंजी प्रवाह का दूसरा पहलू है। कानून बनाने से क्या यौन उत्पीड़न रुक जायेगा? फतवे बंद होंगे?खाप पंचायतें खत्म हो जायेंगी? सम्मान के लिए हत्याएं नहीं होंगी ?रुक जायेंगी भ्रूण हत्याएं? घर की चहारदीवारी में अपनों से सुरक्षित हो जायेगी स्त्री? बंद हो जायेगा दहेज उत्पीड़न? खत्म होगी स्त्री को निशाना बनाकर बेदखली की व्यवस्था?

हाल यह है कि संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि वह भारत में बढ़ती सामूहिक बलात्कार की घटनाओं को लेकर बेहद चिंतित है । साथ ही उसने कहा कि देश में महिलाओं और लड़कियों के संबंध में विचारों में बदलाव आना चाहिए । पैरा-मेडिकल छात्रा के सामूहिक बलात्कार और मौत की आलोचना करते हुए यूनिसेफ की भारत शाखा ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि भारत में प्रत्येक तीन में से एक बलात्कार पीड़िता बच्ची है । यूनिसेफ ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों के प्रति विचारों में बदलाव लाने की आवश्यकता है । यूएन ने कहा कि भारत को इस कानून में बदलाव लाने की जरूरत है।तो दूसरी ओर, भारत में अपने तालिबानी तर्ज पर फरमान जारी करने वाली खाप पंचायत ने अब गैंगरेप के दोषियों को फांसी की सजा दिलवाए जाने का विरोध किया है। केंद्र सरकार द्वारा इस घटना के आरोपियों को कोर्ट में फांसी देने की मांग करने पर पंचायत ने नाराजगी जाहिर की है। हिसार में हुई खाप पंचायत में कहा गया कि सरकार जल्दबाजी में कोई भी ऐसा कानून न बनाए जिसका दुरुपयोग होने की संभावना हो। खाप नेता सूबे सिंह ने यहां के एक गांव में कहा कि अधिकारियों को गैंगरेप के मामले पर जारी जन विरोधों और इसके आरोपियों के लिए मौत की सजा की मांग को देखते हुए भावनाओं में नहीं बहना चाहिए।

बंगाल में २००७ से लेकर २०११ तक १३ हजार से ज्यादा बलात्कार के मामले अदालतों में लंबित है। इनमें से चार हजार मामलों में पुलिस अभी चार्जशीट ही दाखिल नहीं कर पायी। राजनीतिक हरी झंडी न मिलने पर न थाने में एफ आईआर दर्ज हो पाता है और न निष्पक्ष जांच होती है। तफतीश शुरु होने से पहले पुलिस को अपनी खाल बचाने की फिक्र लगी होती है। पुलिस जांच शुरु करें , इससे पहले कोई मंत्री या फिर मुख्यमंत्री मामले को फर्जी बता देती ​​हैं।अपराध कर्म राजनीतिक संरक्षण के बिना नहीं होता। गुजरात में तो एक नहीं, दो नहीं, बीस बीस बलात्कारी राजनीतिक दलों के टिकट पर ​​चुनाव लड़े। कोलकाता में जब दिल्ली सामूहिक बसात्कार के खिलाफ मोमबत्ती जुलूस निकल रहा था तभी डायमंड हारबर और बारासात में बलात्कार के बाद हत्या की वारदातें हुईं। राज्यभर में ऐसी वारदाते होती रहती हैं। पर उन मृतकाओं और पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए कहीं कोी मोमबत्ती नहीं जलाया जाता। और कार्रवाई, बारासात कांड के दोदिन बीत जाने के बावजूद पुलसे यह बताने की हालत में नहीं है कि बलात्कार हुआ है कि नहीं। चूंकि लाश बरामद हो गयी है , तो अब यह तो कह नहीं सकते कि हत्या भी नहीं हुई। बारासात कोलकाता से सटे उत्तर चौबीस परगना का जिला मुख्यालय है और तेजी से बलात्कार नगरी के नाम पर कुख्यात होता जा रहा है।यहीं १४ परवरी को शाम को पुलिस मुख्यालय के पास शाम को कोलकाता से नौकरी करके लौट रही दीदी को गुंडों से बचाने के लिए उसके भाई माध्यमिक परीक्षार्थी राजीव दास को अपनी जान गवानी पड़ी। इस कांड पर रघुवीर यादव की भूमिका समेत एक फिल्म भी बन चुकी है पर बारासात के हालात नहीं बदले।

बहरहाल मीडिया के हंगामे की वजह से गनीमत है कि कम से कम इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो गयी।इसी तरह मीडिया में छपी खबरों के कारण २ अगस्त को बारासत जिलाधीश कार्यालय को एक पुलिस परिवार के खिलाफ यौन आक्रमण के मामले में भी चार्जशीट दाखिल हो गयी।२७ अप्रैल ​​२०१२ को एक छात्रा का अपहरण हुआ और फिरौती के बदले उसे छुड़ा लिया गया। इस मामले में अभीतक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई। २७ जुलाई को बारासात रेलवे स्टेशन पर ही एक छात्रा से छेड़खानी हहुई, विरोध करने पर गुंडों ने उसके पिता को धुन डाला। २० अगस्त २०१२ को फिर​​ बारासात में एक किशोरी सेछेड़छाड़ की वारदात दर्ज की गयी।२१ अगस्त २०१२ बारासात के बगल में ही वामूनगाछी में एक बार डांसर से​ ​ बलात्कार हुआ।३१ अगस्त२०१२ को बारासात में बेटी से छेड़छाड़ करने का विरोध करने पर मांकी पिटाई हो गयी। इस मामले में चार्जशीच तक दाखिल नहीं हो सकी।३ सितंबर को छेड़खानी का विरोद कर रहे चिकित्सक की हत्या हो गयी बारासात में।फिर २९ दिसंबर को बारासात के पास ईंट भट्ठे में एक ४५ साल की महिला की उसके पति के सामने ही  सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या हो गयी। पति को बलात्कारियों ने तेजाबी जहर जबरन पिला दी और वह अस्पताल में मौत से जूझ रहा है। पुलिस अभी यह बताने की हालत में नहीं है कि बलात्कार हुआ भी या नहीं। यह बंगाल के एक जिला मुख्यालय की कथा ​​व्यथा है। बाकी देश में भी कमोबेश यही हालत है। बारासात में अभी किसी मामले में मौजूदा कानून के तहत सजा नहीं हो सकी। तो सख्त कानून का क्या कीजियेगा?औरतें अपने-अपने खोलों से निकल कर बाहर आ रही हैं। वे दफ्तरों, दुकानों और फैक्टरियों में आदमियों के साथ काम करने लगी हैं। ऐसे में बलात्कार के मामले बढ़ेंगे ही, जब तक हम अपने कानून में जबर्दस्त बदलाव नहीं करते।​यह  जरुरी है , लेकिन मसले का हल नहीं है। मौजूदा कानून को ही बिना किशी बेदबाव या संरक्षण के सबके मामले में समान रुप से सख्ती के साथ लागू किया जाये, तो हालात ,जरूर बदलेंगे। कानून सख्त से सख्त हो और मामला दर्ज ही न हो, जांच राजनीतिक हो तो ऐसे कानून से क्या होगा? आखिरकार हत्यारों को मिलने वाली मौत की सजा से हत्याओं में कोई कमी नहीं आई है।इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध की कठोर सजा दी जानी चाहिये, लेकिन सजा तो घटना के घटित होने के बाद का कानूनी उपचार है। हम ऐसी व्यवस्था पर क्यों विचार नहीं करना चाहते, जिसमें बलात्कार हो ही नहीं। हमारे देश में केवल स्त्री के साथ ही बलात्कार नहीं होता है,बल्कि हर एक निरीह और मजबूर व्यक्ति के साथ हर दिन और हर पल कहीं न कहीं लगातार बलात्कार होता ही रहता है!

भारतीय दंड विधान में बलात्कार के दोषी को धारा 376 के तहत सजा दी जाती है। इस धारा के अंतर्गत बलात्कार के केस दर्ज होते हैं। इस धारा के अंतर्गत पीड़ित महिला सीधे थाने में जाकर आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा सकती है। यदि पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं करती है तो पीड़ित महिला कोर्ट की शरण लेकर भी आरोपी के खिलाफ केस रजिस्टर्ड कर सकती है।धारा 376 में सजा : अधिकतम सजा उम्रकैद है। केस की स्थिति के अनुसार अदालत 7 और 10 साल की सजा सुनाती है। पीड़िता की मौत होने पर फांसी की सजा भी हो सकती है।क्या इस कानून को सक्ती के साथ अमल में लाया जाता है?
​​

कानून पर अमल कैसे होता है? मिसाल के तौर पर बहुप्रचारित ''यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण अधिनियम'' (POCSO) 14 नवंबर 2012 से अस्तित्व में आया। अधिनियम के कार्यान्वयन के समय महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमति कृष्णा तीरथ ने दावा किया था कि यह अधिनियम देश में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की संख्या में वृद्धि के कारण पैदा हुईं सभी समस्याओं का हल निकालने में सक्षम है। इस अधिनियम के पारित होने के करीब 50 दिन बाद भी जमीनी स्तर पर अधिक बदलाव नहीं आया है। दिल्ली के नरेला में गत 25 नवंबर को चार वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार किया गया। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता वंश सलूजा ने रियल न्यूज को बताया कि जब यह मामला आम आदमी पार्टी के स्वयंसेवकों के संज्ञान में आया तो उन्होंने पुलिस पर दबाव बनाया कि बच्ची का चिकित्सा परीक्षण कराया जाए। लेकिन उनके भरपूर प्रयासों के बावजूद पुलिस ने बच्ची की चिकित्सा जांच नहीं कराई। इस से बुरा यह हुआ कि एक दिसंबर को जब आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जांच के लिए पुलिस पर दबाव बनाने की चेष्टा की तो उनपर लाठियां भांजी गईं।

गौरतलब है कि आजादी के बाद इस देश में गरीबों, अनुसूचितों, आदिवासियों, बस्तीवासियों की तरफ से हर मामले में एफआईआर दर्ज नहीं​ ​ होता।फूलन देवी का जैसा वृतांत सबूत बतौर उपलब्ध है कि थानों में स्त्री के साथ पुलिस क्या सलू क करती है। फिर हर मामले को लेकर मीडिया खबर नहीं बनाता। घर के अंदर हुई वारदातों की कानोंकान खबर तक नहीं होती। इस पर तुर्रा यह कि भारत में न्याय प्रणाली और संविधान शास्त्रसम्मत मनुस्मृति विधान के मुताबिक बनाने का अभियान जोरों पर है। बलात्कार की सजा सजाए मौत भी मध्यपूर्व के धर्मराज्यों के कानून के मुताबिक बैठता है।

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने बलात्कार को लेकर सख्त सजा के प्रावधान की पैरवी करते हुए कहा है कि उनकी सरकार केंद्र से कानून में जरूरी बदलावों का आग्रह करेगी, ताकि ऐसे अपराधों में शामिल लोगों को मृत्युदंड की और रसायन का इस्तेमाल कर नपुंसक बनाने की सजा दी जा सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा कि बलात्कार के मामलों में शामिल लोगों को मौत और रसायन का इस्तेमाल कर नपुंसक बनाने की सजा देने के लिए कानूनों में संशोधन किया जाए।उन्होंने कहा कि राज्य में गुंडा एक्ट को संशोधित करने और त्वरित महिला अदालतें स्थापित करने के लिए कदम उठाएं जाएंगे। जयललिता ने कहा कि सभी सरकारी इमारतों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि महिलाओं को परेशान करने वालों की पहचान हो सके।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार की निंदा की। अगर पश्चिम बंगाल में बलात्कार और छेड़खानी की घटनाएं होती हैं, तो मैं उन्हें भी निंदनीय मानती हूं। ममता बनर्जी ने आज कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों से निपटने के लिए उनकी सरकार राज्य भर में 65 महिला पुलिस थाने स्थापित कर रही है।जलपाईगुड़ी के पास रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, 'बंगाल में 65 महिला पुलिस थाने होंगे जिनमें सभी महिला पुलिसकर्मी होंगी। इनमें से 10 पहले ही स्थापित किये जा चुके हैं।' आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि प्रत्येक थाने में स्वीकृत पदों के तहत एक निरीक्षक, आठ उप निरीक्षक, आठ सहायक उप निरीक्षक और 30 कांस्टेबल होंगे। उन्होंने कहा कि 19 मानवाधिकार अदालतें और 158 फास्ट ट्रैक अदालतें भी स्थापित की गई हैं।उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) अध्यक्ष मायावती ने दिल्ली में सामूहिक बलात्कार कांड की पीड़ित की सिंगापुर के अस्पताल में मृत्यु पर दुख व्यक्त करते हुए महिलाओं के प्रति अपराधों के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाने और इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।मायावती ने संवाददाताओं से कहा कि केंद्र सरकार को सामूहिक बलात्कार की वारदात को गंभीरता से लेते हुए महिलाओं की सुरक्षा के लिए मौजूदा कानून में व्यापक परिवर्तन करने की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। इस काम में ढुलमुल रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए जिससे अपराधी बलात्कार जैसी वारदात को अंजाम देने से पहले 10 बार सोचे।मायावती ने कहा कि उन्होंने इस सिलसिले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र भी लिखा था। उन्होंने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री से गुजारिश की है कि वह बलात्कार के मामलों में कानून में बदलाव करने में कोई देर न करें और इसे लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए। अगर फांसी की सजा तय होती है तो बीएसपी उसका स्वागत करेगी।बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शांता कमार ने दिल्ली गैंग रेप मामले से उठे मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र तुरंत बुलाने की मांग की।

महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के खिलाफ सख्त कानून बनाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग के बीच सरकार ने सोमवार को कहा कि वह जस्टिस वर्मा कमिटी की रिपोर्ट के आने के बाद इस पर विचार करेगी। यह कमिटी महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए कड़े कानून बनाने के बारे में ही विचार कर रही है।

दिल्ली गैंगरेप के बाद देश भर में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाने की मांग के बीच कांग्रेस ने एक सख्त कानून बनाने के लिए बिल का ड्राफ्ट बनाना शुरू कर दिया है। इंग्लिश न्यूज पेपर इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार रेपिस्टों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए कांग्रेस जस्टिस वर्मा कमिटी को सुझाव के तौर पर यह ड्राफ्ट पेश करेगी। इसके ड्राफ्ट के तहत बलात्कार के दोषियों को 30 साल तक कैद की सजा की सिफारिश की जाएगी। इसके अलावा इस ड्राफ्ट बिल में रेपिस्टों को केमिकली बधिया करने और 90 दिन की डेडलाइन के साथ फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का सुझाव भी शामिल है।

यह ड्राफ्ट बिल करीब करीब तैयार है और इसे यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी दिखाया जा चुका है। सोनिया ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते क्राइम को देखते हुए पार्टी को सख्त कानून बनाने को लेकर सक्रियता दिखाने का निर्देश दिया था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जे. एस. वर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमिटी गठित की जो सारे पहलुओं की स्टडी के बाद महिलाओं अपराध के खिलाफ कड़े कानून बनाने पर सुझाव देगी। वर्मा कमिटी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा और पीड़ित को तुरंत न्याय दिलाने को लेकर 30 दिनों की डेडलाइन में काम कर रही है। इसके लिए कमिटी ने 5 जनवरी तक देश भर के लोगों से सुझाव मांगे हैं।

सूत्रों के मुताबिक जस्टिस वर्मा कमिटी के सुझावों के बाद कांग्रेस पार्लियामेंट का विशेष सत्र बुलाने के बजाय सरकार पर नोटिफिकेशन जारी करने का दबाव डालेगी। इसके बाद ऑल पार्टी मीटिंग के जरिए कांग्रेस इस पर सभी दलों से उनका रुख जानकर कड़े कानून के लिए सलाह-मशविरा करेगी।

सरकार ने राजनीतिक पार्टियों से महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करने और त्वरित न्याय के लिए कानून में संशोधन करने को लेकर गठित न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति को अपने विचार देने को कहा है।

दिल्ली में चलती बस में 23 वर्षीय छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मद्देनजर सभी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को लिखे अपने पत्र में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि सरकार ने महिलाओं के खिलाफ क्रूर प्रकृति के यौन उत्पीड़न से जुड़े मौजूदा कानून की समीक्षा की जरूरत को लेकर अपने व्यग्र विचार प्रकट किए हैं।

गौरतलब है कि सरकार ने फौजदारी कानून में संभावित संशोधन पर गौर करने के लिए 23 दिसंबर को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) वर्मा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी ताकि इस तरह के मामलों में त्वरित सुनवाई हो और सख्त सजा मिल सके।

शिंदे ने अपने पत्र में कहा है, 'यदि आप इस मुद्दे पर अपने विचार समिति को देते हैं तो मैं आपका शुक्रगुजार होउंगा। इससे समिति अपनी सिफारिशें करने के लिए इन पर विचार कर सकेगी। मैं आपसे यथाशीघ्र अपने विचार देने का अनुरोध करता हूं क्योंकि समिति को शीघ्रता से अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने को कहा गया है।'

तीन सदस्यीय इस समिति को 30 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने को कहा गया है। समिति के अन्य सदस्य हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) लीला सेठ तथा सॉलीसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम हैं।

न्यायमूर्ति वर्मा समिति पूरी तरह से अपने कार्य में जुट गई है और यह नई दिल्ली में विज्ञान भवन एनेक्सी में स्थित है। इससे टेलीफोन नंबर 011-23022031 और ईमेल पता 'जस्टिस डॉट वर्मा एट द रेट ऑफ निक डॉट इन' पर संपर्क किया जा सकता है।

मौजूदा कानून के तहत बलात्कार के मामले में अधिकतम सजा के रूप में उम्र कैद का प्रावधान है लेकिन 16 दिसंबर की घटना के चलते हुए राष्ट्रव्यापी जनाक्रोश के बाद बलात्कारियों के लिए मौत की सजा की मांग की जा रही है।

इस पीड़िता ने बीते शनिवार को सिंगापुर के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्त कानून के लिए और इस घटना को अंजाम देने वालों को सख्त सजा देने के लिए सरकार को कुछ अहम सुझाव दिए हैं।

भाजपा ने भी इस तरह के जघन्य अपराध को अंजाम देने वालों को मौत की सजा दिए जाने की हिमायत की है और कानून में संशोधन के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।

हालांकि सरकार ने संसद का अविलंब सत्र बुलाने की विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए कहा है कि न्यायमूर्ति वर्मा समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस मुद्दे पर कोई फैसला किया जाएगा।

महिलाओं पर नेतावाणी, सभी दलों की एक कहानी!

दिल्‍ली गैंगरेप पर पूरे देश में आक्रोश है। केंद्र की यूपीए सरकार चारों ओर से घिर चुकी है। वैसे ये पहला मौका नहीं है जब देश में बलात्‍कार की बढ़ती घटनाओं पर हाहाकार मचा हो, लेकिन राजनीतिक दलों की इच्‍छा शक्‍ित और छोटी सोच के कारण कभी ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। फिर चाहे कोई पार्टी सत्‍ता पक्ष में हो या पक्ष में। राजनेताओं ने समय समय पर बताया कि ये जमात कितनी संवदेनहीन हो चुकी है। दुर्भाग्‍य ये है कि राजनीति में शामिल महिलाएं भी देश की बेटियों के जख्‍म कुरेदने में पुरुष राजनेताओं के कंधे से कंधा मिला रही हैं। हाल में सीपीएम के नेता ने पश्चिम बंगाल की सीएम से कहा, 'आप अपना रेप कराने का कितना मुआवजा लोगी।' एक प्रदेश की सीएम के लिए एक विधायक ऐसे शब्‍दों का इस्‍तेमाल कर रहा है तो आम महिला की स्थिति का अंदाजा खुद लगाया जा सकता है। ये हाल सिर्फ एक पार्टी का नहीं है, क्‍या कांग्रेस और क्‍या सपा, क्‍या टीएमसी और क्‍या बसपा सभी एकदूसरे से आगे दिखना चाहते हैं। आइए जानते हैं महिलाओं के बारे में और रेप के मामलों पर हमारे देश के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने किस भाषा में अपने विचार प्रकट किए?    

तृणमूल कांग्रेस नेता काकोली घोष का बयान: तृणमूल कांग्रेस की नेता काकोली घोष ने पश्चिम बंगाल के पार्क स्‍ट्रीट रेप केस के बारे में कहा कि ये मामला बलात्‍कार का नहीं है। ये केस महिला और क्‍लाइंट के बीच विवाद का नतीजा है यानी घोष के कहने का मतलब ये था कि बलात्‍कार की शिकार लड़की जिस्‍मफरोशी करती है। ऐसा पहली बार नहीं है जब रेप की शिकार लड़कियों पर ऐसी बयानबाजी हुई हो। दुर्भाग्‍य की बात ये है कि ऐसे बयान देने में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं।  

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी: पहले लड़के-लड़कियां अगर एक दूसरे का हाथ पकड़ लेते थे तो उनके माता-पिता उन्हें पकड़ लेते थे, डांटते थे पर अब सब कुछ खुला है। खुले बाज़ार में खुले विकल्पों की तरह। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने महिलाओं के साथ बलात्कार की बढ़ती संख्याओं पर अपने फेसबुक पर ये टिप्पणी दर्ज की थी, उनकी इस टिप्पणी पर महिला संगठनों ने काफी आपत्ति जताई थी।

सीपीएम के विधायक का बयान: राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी की महिलाओं पर अभद्र टिप्‍पणी को लेकर बवाल अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि पश्चिम बंगाल के एक और नेता नया विवाद खड़ा कर दिया। ताजा विवाद सीपीएम के विधायक अनिसुर रहमान के बयान पर हो रहा है। रहमान ने दीनापुर में एक रैली के दौरान प्रदेश की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी पर भद्दी टिप्‍पणी की। रैली के दौरान सरकार की नाकामी गिनाते हुए रहमान ने कहा, 'ममता बनर्जी अगर तुम्‍हारा रेप हो जाए तो तुम कितना पैसा लोगी।'

राष्‍ट्रपति का बेटा बोला, ये औरतें तो...: राष्ट्रपति के पुत्र और कांग्रेस के सांसद अभिजीत मुखर्जी ने गैंगरेप के खिलाफ प्रदर्शन कर रही छात्राओं और महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि पहले कैंडल मार्च निकाला जाता है और उसके बाद प्रदर्शनकारी डिस्को चले जाते हैं। अभिजीत यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि मैं भी छात्र रहा हूं। मैं जानता हूं कि छात्र कैसे होते हैं। वो बहुत सुंदर महिलाएं, जो मेकअप से पुती हुई और सजी-धजी हैं, टीवी पर इंटरव्यू दे रही हैं वो छात्राएं नहीं हैं।

सोनिया बोलीं, हरियाणा ही नहीं पूरे देश में हो रहे रेप: हरियाणा में एक के बाद एक हो रही बलात्कार की घटनाओं के बीच पीड़ितों से मिलने यूपीए चेयरपर्सन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी यहां पहुंची। जींद में सोनिया ने बलात्कार की शिकार लड़की के परिजनों से मुलाकात की। मुलाकात के बाद पत्रकारों से सोनिया ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं लेकिन ऐसा सिर्फ हरियाणा में नहीं देश के सभी राज्यों में हैं।

कांग्रेस के नेता संजय बोले, तू तो ठुमके लगाती है: दिल्‍ली गैंगरेप को लेकर सभी पार्टियों के नेता एक से बढ़कर एक बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में वो खुद महिलाओं की इज्‍जत नहीं करते तो देश में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल कैसे पैदा होगा। इस बात का ताजा उदाहरण हमें तब देखने को मिला जब एक नेशनल टीवी पर लाइव बहस के दौरान कांग्रेस पार्टी के वरिष्‍ठ नेता संजय निरुपम ने भाजपा नेता और अभिनेत्री स्‍मृति ईरानी पर अभद्र टिप्‍पणी की। निरुपम ने ईरानी से कहा, तू तो टीवी पर ठुमके लगाती थी और चुनाव विश्‍लेषक बन गई है।

कांग्रेसी नेता बोला 'लड़की खुद चाहती है कि रेप हो': हरियाणा में बलात्कारी ही महिलाओं के साथ बलात्कार नहीं कर रहे है बल्कि उनके बचाव में नेताओं द्वारा नए-नए तर्क गढ़े जा रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्य धर्मवीर गोयत ने कहा कि हरियाणा में सामने आए बलात्कार के ज्यादातर मामले दरअसल सहमति से सेक्स के मामले हैं। गोयत ने कहा कि अगर अपहरण और बलात्कार के मामलों की तह तक जाएं तो पता चलता है कि 90 फीसदी मामलों में पीड़ित और आरोपी भागे हुए प्रेमी जोड़े हैं यानी ये सहमति है।

सोनिया से बोले रामदेव, आपकी बेटी से रेप होता तो...: बाबा रामदेव ने सोनिया के इस बयान की निंदा करते हुए कहा, 'सोनिया गांधी हरियाणा की कांग्रेस का बचाव कर रही हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अगर उनकी बेटी के साथ ऐसा हुआ होता, क्‍या तब भी वह ऐसी ही बात कहतीं।'यह पूरा मामला सोनिया गांधी के उस बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्‍होंने कहा था, 'बलात्‍कार की घटनाएं सिर्फ हरियाणा नहीं बल्कि पूरे देश में बढ़ रही हैं।'यूपीए चेयरपर्सन ने जींद में बलात्‍कार की शिकार लड़की के परिवार से मिलने के बाद यह बात कही थी।

रेणुका बोलीं, क्‍या रेप की शिकार बाबा की बेटी है?: बाबा रामदेव का यह बयान आग लगाने के लिए कम नहीं था, लेकिन बात जब सोनिया गांधी की हो तो कांग्रेसी भी कहां पीछे रहने वाले थे। बुधवार को कांग्रेस प्रवक्‍ता रेणुका चौधरी ने बाबा पर उन्‍हीं के अंदाज में पलटवार कर दिया। रेणुका ने कहा, 'बाबा इस मामले पर इतनी संवेदनशीलता क्‍यों दिखा रहे हैं? क्‍या बलात्‍कार की शिकार लड़कियां उनकी बेटियां लगती हैं?'आपा खो बैठीं रेणुका ने आगे कहा, 'रामदेव योग गुरु हैं या जो भी उन्‍होंने कभी आईने में अपना चेहरा देखा?'दूसरी ओर कांग्रेस के अन्‍य नेता हरीश रावत ने बाबा के बयान को दुर्भाग्‍यपूर्ण बताया है।

मुलायम सिंह बोले थे, रेपी पीडि़ता को देंगे नौकरी: कुछ महीने पहले संपन्‍न यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह ने वादा किया था वो बलात्‍कार की शिकार लड़कियों को नौकरी देंगे। उनके इस बयान पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।

`लड़की को बस से कुचलने की कोशिश की गई`
दिल्ली गैंगरेप मामले में नया खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक मुताबिक गैंगरेप पीड़ित लड़की को बस से कुचलने की कोशिश की गई थी लेकिन उसके दोस्त ने उसे पहिए के नीचे आने से बचाया। छह आरोपियों में से एक आरोपी रामसिंह ने लड़के की लोहे के रॉड से पिटाई की।

जानकारी के मुताबिक तीन जनवरी को दाखिल की जानेवाली चार्जशीट में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराएं लगाई हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ डकैती की धारा को भी जोड़ा है। आईपीसी की धारा 396 यानी डाका डालने के अलावा हत्या की धारा 302 भी लगाई गई है।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक हादसे की रात यानी 16 दिसंबर को पीड़ितों को बस से कुचलने की भी कोशिश की गई थी। पुलिस के मुताबिक बस में तीन आरोपी मुसाफिरों की तरह बैठे थे। इससे पीड़ितों को भी उनके मुसाफिर होने की गलतफहमी हो गई। बस में पीड़ितों के बैठने के बाद राम सिंह ने झगड़े की शुरुआत की।


पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस आरोप पत्र में 16 दिसंबर की घटना के संबंध में 30 गवाहों का हवाला दिया गया है। गौरतलब है कि पीड़िता छात्रा की शनिवार सुबह सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई।

जांचकर्ताओं ने कहा कि वे इस मामले के अभियुक्तों के खिलाफ मौत की सजा की मांग करेंगे। साकेत की अदालत में दायर किए जाने वाले आरोप पत्र में इस घटना में शामिल पांच लोगों की भूमिका विस्तार से दर्ज होगी और मामले में कथित तौर पर शामिल नाबालिग लड़के की सुनवाई के लिए किशोर न्याय बोर्ड को अलग से एक रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

अधिकारी ने बताया कि आरोप पत्र में घटनाक्रम, इलाज, पीड़िता को सिंगापुर के एक अस्पताल में भेजने और उसकी मौत का पूरा ब्योरा दिया जाएगा। पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ बलात्कार, हत्या और अन्य आरोप लगाए हैं।

महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए कार्यबल गठित

केंद्रीय गृह सचिव की अगुवाई में एक विशेष कार्यबल गठित किया गया है जो हर पखवाड़े राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दों की समीक्षा करेगा।

गृह मंत्रालय से मंगलवार को जारी एक बयान के अनुसार यह 13 सदस्यीय कार्यबल नियमित तौर पर दिल्ली पुलिस की कार्य पद्धति की समीक्षा करेगा। यह कार्यबल महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पुलिस और दिल्ली सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की भी नियमित समीक्षा करेगा।

कार्यबल इस मुद्दे पर चर्चाओं के दौरान संसद सदस्यों की ओर से दिए गए सुझावों पर भी विचार करेगा।

इस कार्यबल के सदस्य दिल्ली के मुख्य सचिव, दिल्ली के पुलिस आयुक्त, दिल्ली पुलिस विशेष आयुक्त (यातायात), विशेष आयुक्त (कानून एवं समीक्षा) और दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष होंगे।

कार्यबल के अन्य सदस्य नई दिल्ली नगर परिषद् (एनडीएमसी) के अध्यक्ष, यातायात आयुक्त, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार, पूर्वी, उत्तरी एवं दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त, उत्पाद आयुक्त और गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (यूटी) हैं।

बयान में कहा गया है कि कार्यबल ऐसे किसी सदस्य को भी शामिल कर सकता है जिसे वह उपयुक्त समझता है।

`गैंगरेप पीड़ता के नाम पर हो बलात्कार विरोधी कानून का नाम`

केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने मंगलवार को यह कहते हुए सामूहिक बलात्कार कांड की पीड़ित 23 वर्षीय छात्रा की पहचान सार्वजनिक करने की वकालत की कि उसका नाम गुप्त रखने से कौन सा हित सध रहा है। उनके इस बयान से विवाद खड़ा हो सकता है।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री थरूर ने यह भी कहा कि यदि पीड़िता के माता-पिता को आपत्ति न हो तो संशोधित बलात्कार विरोधी कानून का नाम उसी के नाम पर रखा जाए।

थरूर ने ट्विटर पर कहा,'आश्चर्य होता है कि दिल्ली के सामूहिक बलात्कार कांड की पीड़िता का नाम गुप्त रख कर 'पता नहीं' कौन सा हित सधा है। क्यों न एक ऐसे वास्तविक व्यक्ति के रूप में उसका नाम लिया जाए और उसे सम्मान दिया जाए जिसकी अपनी एक पहचान है।'

अपने मन की बात रखने के लिए मशहूर केंद्रीय मंत्री ने कहा,'यदि उनके अभिभावक को आपत्ति न हो तो उसे सम्मानित किया जाए और उसी के नाम पर संशोधित बलात्कार विरोधी कानून का नाम रखा जाए। वह एक मनुष्य थी जिसका अपना नाम था न कि वह एक प्रतीक थी।'

कानून के तहत बलात्कार पीड़िता का नाम उद्घाटित नहीं किया जा सकता है। बलात्कार पीड़िता का नाम प्रकाशित करने या उससे नाम को ज्ञात बनाने से संबंधित कोई अन्य मामला आईपीसी की धारा 228 ए के तहत अपराध है।

थरूर का बयान ऐसे वक्त में आया है जब दिल्ली पुलिस ने ऐसी सामग्री प्रकाशित करने पर एक अंग्रेजी दैनिक के खिलाफ मामला दर्ज किया है जिससे पीड़िता की पहचान सार्वजनिक हो सकती है।

थरूर के बयान से ट्विटर पर बहस छिड़ गई है। जहां कुछ लोगों ने उनका समर्थन किया है, वहीं कुछ अन्य ने इस सुझाव पर प्रश्न खड़ा किया है।

चिरदीप नामक एक व्यक्ति ने पूछा है,'अपराध न्याय प्रणाली में असल परिवर्तन करने के बजाय सम्मान प्रदान करने, मूर्ति बनाने मंदिर बनाने जैसी बातें क्यों कर रहे हैं आप।' एक अन्य व्यक्ति अनिल वनवारी ने लिखा है,'एक अच्छा सुझाव है। यही बात मैंने चार दिन पहले कही थी।'

उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर को एक चलती बस में छह व्यक्तियों ने लड़की का सामूहिक बलात्कार किया था और उस पर इस कदर दरिंदगी की थी कि लगभग एक पखवाड़े तक जिन्दगी और मौत के बीच झूलने के बाद उसने 29 दिसंबर को सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया।

सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने ट्विटर पर कहा,'मैं बलात्कार पर नया कानून का नाम उसके असली नाम पर या 'निर्भया' नाम पर रखने के थरूर के सुझाव का समर्थन करती हूं। ऐसा अमेरिका में हो चुका है। ऐसा कर हम बलात्कार के कृत्य को नहीं बल्कि संघर्ष एवं जिंदगी जीने की उसकी इच्छा को अमर कर देंगे। इस तरह हम दाग हटा सकते हैं।'

Fwd: Devon DB: What are the Benefits of Going Off "The Fiscal Cliff"?



---------- Forwarded message ----------
From: Global Research E-Newsletter <newsletter@globalresearch.ca>
Date: Tue, Jan 1, 2013 at 5:31 PM
Subject: Devon DB: What are the Benefits of Going Off "The Fiscal Cliff"?
To: palashbiswaskl@gmail.com


Having trouble viewing this email?
Click here
http://campaign.r20.constantcontact.com/render?llr=o8b4necab&v=001mlQdTtwnjRBaJaVgr8w4irWJH4J8wTQh1DvNDexiwWsflmj2n-TLa1qdx6gnR6C50_cryxKBCpI2Jyo_ny59cYkteQ1bsJ-mKBtP0uKZOPHiRjP4xzeRiA%3D%3D
What are the Benefits of Going Off "The Fiscal Cliff"?

By Devon DB
Global Research, December 31, 2012
Url of this article:
http://www.globalresearch.ca/what-are-the-benefits-of-going-off-the-fiscal-cliff/5317484

It was reported recently that Senator Harry Reid thinks that the fiscal cliff is coming, saying that Republicans would be to blame "if we go over the cliff, and it looks like that's where we're headed."[1]

The media has been talking up the fiscal cliff and making it seem as if were going to be the end of the world, however, we should have actively been expecting this, seeing as how last year the super committee didn't come to a deal[2] and thus effectively resigned the nation to this fiscal cliff. Yet, there could be a silver lining to all of this.

Before getting into what the benefits of going off this 'cliff' could be, it must first be stated that the fact of the matter is that the fiscal cliff itself is not a cliff; rather it is a mixture of tax increases and spending cuts that will automatically go into effect on January 1st of the new year.

The cliff gets rid of some of the tax breaks for the rich and for corporations while also instituting "a 7.6 to 9.6 percent across the board cut in all discretionary spending, except programs for low-income Americans," with the cuts being "evenly divided between defense and nondefense programs."[3]

While this would definitely hurt the agencies, we need that hurt as it is defense that needs to be cut the most as it has been doubling since 2001.[4]

The fact of the matter is that the US government has tried again and again to get the debt and deficit under control, but each time they have spectacularly failed, with the most recent failing in memory being the debt ceiling debacle in which the US credit rating was downgraded. So it seems that this is the only way for the country to get its act together. Going over the so-called fiscal cliff would force Washington to actually do something about its fiscal policies.

Yet the real silver lining to this lies in the American people.

After having been pulled hook, line, and sinker for several years by politicians saying that they care about the American people and the country, only to then turn around and do what is best for their re-election chances and corporate donors, the American people will hopefully come to the realization that the political class does not care about them.

Republicans don't care about the people and neither do Democrats. If this occurs, the people will reject both major parties and involve themselves in "the creation of an independent political movement –to create the transformations needed in the United States."[5]

That is where our hopes must lie during this time of crisis.

Not in politicians hashing out deals that don't address the actual problems we as a nation are facing.

We must place our hope in the American people.

Notes

[1] Oliver Knox, "Reid says fiscal cliff dive likely; blasts Boehner for lacking leadership," Yahoo! News, December 27, 2012 (http://news.yahoo.com/blogs/ticket/reid-says-fiscal-cliff-dive-likely-blasts-boehner-171600314–politics.html)

[2] Ted Barrett, Kate Bolduan and Deirdre Walsh, "'Super committee' fails to reach agreement," CNN Politics, November 21, 2011 (http://articles.cnn.com/2011-11-21/politics/politics_super-committee_1_deficit-reduction-republicans-committee?_s=PM:POLITICS)

[3] Suzy Khimm, Ezra Klein, Dylan Matthews and Brad Plumer, "The Fiscal Cliff: Absolutely everything you could possibly need to know, in one FAQ," Washington Post, December 3, 2012 (http://www.washingtonpost.com/blogs/wonkblog/wp/2012/11/27/absolutely-everything-you-need-to-know-about-the-fiscal-cliff-in-one-faq)

[4] Judd Legum, "REPORT: U.S. Military Spending Has Almost Doubled Since 2001," Think Progress, April 11, 2011 (http://thinkprogress.org/politics/2011/04/11/157596/military-spending-doubled-since-2001/?mobile=nc)

[5] Kevin Zeese, "The Fiscal Cliff, A Self-Created Bi-Partisan Drama. The Need to Mobilize Resistance," Global Research, December 27, 2012 (http://www.globalresearch.ca/the-fiscal-cliff-a-self-created-bi-partisan-drama-the-need-to-mobilize-resistance/5316998)

Copyright © 2012 Global Research

Forward email
http://ui.constantcontact.com/sa/fwtf.jsp?llr=o8b4necab&m=1101807978350&ea=palashbiswaskl%40gmail.com&a=1112018239353





This email was sent to palashbiswaskl@gmail.com by newsletter@globalresearch.ca.

Update Profile/Email Address
http://visitor.constantcontact.com/do?p=oo&mse=001Y9XAqyV8VF0P5VFIo8dIEvw1A2ipB-2PFVJrBUuy0b0%3D&t=001eBV4Hcx90mkfVoSFTwXuuw%3D%3D&l=001FCSs65SMrsI%3D&llr=o8b4necab


Instant removal with SafeUnsubscribe(TM)
http://visitor.constantcontact.com/do?p=un&mse=001Y9XAqyV8VF0P5VFIo8dIEvw1A2ipB-2PFVJrBUuy0b0%3D&t=001eBV4Hcx90mkfVoSFTwXuuw%3D%3D&l=001FCSs65SMrsI%3D&llr=o8b4necab


Privacy Policy:
http://ui.constantcontact.com/roving/CCPrivacyPolicy.jsp





Online Marketing by
Constant Contact(R)
www.constantcontact.com



GLOBAL RESEARCH | PO Box 55019 | 11 Notre-Dame Ouest | Montreal | QC | H2Y 4A7 | Canada










Fwd: Fw: UPA Government is trying everything possible to nullify the effects of protests on the rape victim girl.



---------- Forwarded message ----------
From: calliber biswas <xcalliber_steve_biswas@yahoo.co.in>
Date: Tue, Jan 1, 2013 at 4:42 PM
Subject: Fw: UPA Government is trying everything possible to nullify the effects of protests on the rape victim girl.
To:



UPa government government of scams we have seen 2g scam where chidambaram and pranab banerjee went out, but kanimoji and A.raja got sentanced, then came coalgate scam then also the accusers got away.. after it came commonwealth scam due to which india got suspended from olympics but still the accussed are away. and now the rape.. is it begining of new scam or a politics or an issue when there is no issue.




----- Forwarded Message -----
From: Mohan Gupta <mgupta@rogers.com>
To: S.Poshakwala2@yahoo.com
Sent: Tuesday, 1 January 2013 8:37 AM
Subject: UPA Government is trying everything possible to nullify the effects of protests on the rape victim girl.

                                    UPA Government is trying everything possible to nullify the effects of protests on the rape victim girl.
UPA Govt. took this decision for obvious reason - to satisfy people that the rapists would be either hanged or life-imprisoned. And that will nullify the effect. To do this, there was only one way out - the girl should have died and the charges on the rapists would have been not just rape and attempted murder, but also murder. And law has probably option to hang to death for murder cases. So, UPA(Sonia) will take credit, we have brought justice to the girl.
If we all remember, the death of Tomar gives us sifficient clues that all the ministers in UPA are anti-humans. Mr. Commissioner himself told that they tried to influence the victim's verdict, though he said it was not true. Then, we all know how Tomar died and mercilessly 8 innocent people were charged as murderers (Unfortunately, there is no protest on this). If two eye-witness can produce video footage how they took Tomar to hospital, why police fails to provide video footage that Tomar was beaten, when the incidence occured at the same place, same time of which video is available. Doctors told clearly that Tomar had minor injury and his death was purely due to cardiac failure. The post-mortem report was produced a day after Tomar's body was creamated so that authenticity of the report could not be checked. Obviously, police will not do all these things on their own, when they are directly reporting to Home Minister in such critical situation.
We remember Ramleela ground during Baba Ramdev's protest how people were beaten when they were sleeping, (including molestation of women at both the places) - is it just the police decision to beat people?
Question arises, why police didn't touch anyone during Anna Hazare's protest? And it gives us clue that Hazare's protest was a simple plan to pre-launch protest before Baba Ramdev did it. Motive was to divide people's unity and create confusion with two choices, Anna Hazare (misguided by Kezriwal group) ensured that he didn't joined Baba Ramdev so that movement remained two and not one. However, the credit goes to Baba Ramdev, who is still actively taking the movement unlike Hazare who is waiting for Baba Ramdev to declare a date of protest so that he can declare his date in advance. This culture of people now protesting was seeded by Baba Ramdev, before which this was not visible in the nation. And now, people can come to streets without any leader - that is good for the country. That is real democracy. Without this protest, it was like the whole nation had only one day (to vote) where they can save their nation and the looters of the nation had full five years to finish this nation. Protest has given new strengths to people, beyond that one day voting limitation.
It is a pity that we have lost Damini. I am sure the whole nation, who emotionally joined her, have wept for her (excluding Sonia and her UPA team). Many well-wishers wished she should die because her life would have been worse than hell. However, we all fight to give more and more life to our kindreds, as we tried for Damini.
Now the country should start new discussion on how to bring respect for women in the culture. Currently, the crowd is guided by the philosophy of revenge where they want the culprits to be hanged. But, none is keen to talk on the causes of such incidences. One of the major reason is wine culture. Now law fear applies to one who has urge of sex and is drunk - he will express his lust if opportunity is given beyond the boundary of fear which is known as rape. Second, no eye will look down if a girl moves around half nude without any social fear. According to me, this protest is more close to saying that you can have sex but not rape. The sense of respect will not build in this condition. Think please, can you make people respect girls with this condition where lust is justified. Indian culture don't say so.
 
Chanchal Malviya,
Editor-in-chief, Uttarayan
Founder: www.aryavarta.ac.in,
Founder & Director - Lotus IT Labs Pvt. Ltd.
Medha Edutainment Pvt. Ltd.

Contact: +91 95523 21820
-------
 
UPA Government is trying everything possible to nullify the effects of protests on the rape victim girl.
Congress government not only tried to nullify the effect of protest but by taking unwise decisions which killed the rape victim girl
 
Kannada  Video
Delhi gangrape victim could have been saved, decision to fly her to
Singapore came late: Family
Virender Bhogal <vbhogal@gmail.com> wrote:
From the events of the last couple of weeks in the country, it is clear that the government machinery is well entrenched, robust, self-serving and totally without remorse. It will not change. Starting from Nehru, Krishna Menon and the like to Rahul Gandhi / Vadra at the bottom of the pit and the so called intelligential have either failed or raped the nation - exploited every weakness, destryed every strength.
The jaded oldies, the common downtrodden middle-aged men and women, the optimistic youth are all either disgusted, disheartened or disillusioned. But each is hoping for a change. Each is hoping for appearance of that one lion who will lead them out of this quagmire.
Do you see a lion?
Virender Bhogal
OUR UPA GOVT HAD DONE THE WORST & DIRTIEST ACT BY FIRST RECEIVING THE DEAD BODY OF THAT HELPLESS POOR GIRL AT 03.30 A.M BY SONIA & MANMOHAN SIGH & CREMATING IN SECRECY EARLY IN THE MORNING BEFORE PEOPLE CD HAVE HAD HER DARSHAN OR PEOPLE'S STRONG FEELINGS AGAINST THIS "FAKE" CONGRESS CD BE EXPOSED. I SUSPECT, THAT POSSIBLY, SHE WAS ALREADY BRAIN DEAD BEFORE SHE WAS SENT TO SINGAPORE & THE REST WAS ALL POLITICAL DRAMA ENACTMENT.

I ALSO SUSPECT THAT THE SO CALLED FIGHT BETWEEN THE DELHI POLICE COMMISSIONER & CONGRESS LED DELHI CHIEF MINISTER, SHEILA DIXIT IS ALSO A DRAMA TO MISLEAD THE PEOPLE .

S C GUPTA, MUMBAI.
madhu bhatia <bhatiamadhu@gmail.com> wrote:
This incident with others is just an accumulation. In time the bubble will burst and a new era has to open up.  The time for bad politicians that can be seen will end soon.  Someone somewhere will be God sent. It will happen.
Regards & Pray for a better Future in this country.
I think the power of prayer is great, Least we all can do is Pray.  Take action where possible.
Madhu Bhatia
 
Air-lifting was criticised many eminent doctors in the country including Hyderabad too. Actually that increased the risk for such an unstable patient, possibly hastening her departure., is what they said.
Then to make her faceless, is intriguing too. I am more and more concerned that truly intellectuals of our country are becoming useful idiots, as defined by Krugman. No one really wants to expose the powerful secret of government t - the well nourished and hidden mechanism of secretly interpreting public policy for private benefit.
Union government has acted against wishes of people by managing a super-sonic cremation of the brave girl in early morning hours without giving people a chance to pay homage. If bodies of political leaders can be kept for 'darshan' for long and 'samadhis' created against norms set by Union Cabinet, then it was the fittest case for cremation with full state-honour and a memorial created at cremation-site like is done for deceased former Presidents and Prime Ministers. Without revealing identity of the brave physiotherapist-student, it may not be possible to honour her posthumously with country's highest civilian award for bravery namely Ashok Chakra an honour undoubtedly deserved by her.
I wish to know that why Mr Manmohan Singh and Mrs. Sonia has gone to air port
what was the medical need to shift to Singapore.
Are we Indians as low in medical management?
1. The body reached Delhi airport at 3.30 AM and aircraft taken to a remote location. SOnia Gandhi and Manmohan Singh reached, conveyed condolences and the body was taken to the house of the deceased with her parents and brother present, as per media report.
2.Apparently the body reached home at 4.30AM and the Home Secretary alongwith MOS Home were already present to take the body and cremate it secretly before dawn, contrary to the earlier assurance to the family that it would be flown to Varnasi and by road to Ballia where her relatives could pay last respects and cremated at the village, she was born.
3. But the team led by Home Secretary forcibly took the body to Delhi Crematorium, the mother fainted and the brother objected with the wailing helpless father nearby, all ignored by the Govt. and the body was cremated at 7.30AM before Delhi woke up in the winter fog.
4. Some Doctors as well as the parents/brother, were in disagreement of shifting her to Singapore, her already suffering two cardiac arrests and half dead condition. But Group of Ministers decided to shift her so that mass agitations could be avoided if she died in Delhi. The cremation was also carried out post-haste before the public could know the body has arrived and try to gather there!!
All these show the sinister inhumane actions of the Govt. in not respecting the family's duty and wishes to show her body to their kith and kin back in Ballia village in Bihar and to cremate her there.
Shockingly, the brother or parents were never allowed to meet the media nor the girl's name revealed with fake names circulating and it was Singapore hospital which released the name sa Jyoti from Ballia, Bihar.
Sucheta Dalal - sucheta@moneylife.in
Hi... dont understand why you wanted her airlifted out of india when she was already sinking or probably brain dead already?
Am a little confused.
Also understand that her family wnats to talk, so why should she remain faceless and nameless, if the family is ready to go public. Like keenan santos she should be a known symbol of
courage and revolution - if her family is okay with it. I hear that her family is being pressured by the government to keep quiet.
I dont understand why her funeral had to be hush-hush and quiet -- why not a hero's funeral for her?
Would like to hear from you.
Managing Editor
Very disturbing news! Feel very sad for her and her parents. Braveheart! RIP.
Public anger should be directed to Electoral, Judicial and Police reforms.
·      All MPs and MLAs charged for any crime should be thrown out of Parliament/Assemblies. Political parties should be forbidden to give membership to such people.
·      Police Reforms as approved by the Supreme Court in 2006 should be implemented in letter and spirit by all states.
·      Fast courts to deal with crimes against women.
·      Respect for women in society should be part of social studies in all schools. No religion or Khap Panchayat should be allowed to pass dictats that violate this spirit.
General (Retd) V P Malik
It is a fact that majority of rape cases have not been reported to the police because the victims have to undergo lot of mental agony in the police station and as well as in the court room in front of many men. The following are the suggestion to overcome this lacuna. Atrocities against women should be handled only by women( police, lawyers and judges should all be women in the Fast Track courts.). They should be given special training to handle these cases. Cross -examination of the victim in the open court room should be avoided to the extent possible, if it is a medically proven case, and Video Conference technology may be used. My request is that women should come forward in large numbers to take up these professions so that later on the Govt. will not come out with an excuse that they are not getting sufficient women to handle the cases.
A big question for AIIMS
After rape victim's death, reporters and people are asking Bhaaratiya government why government sent her to Singapore till her condition was more stable.
Was it that to dilute the intensity and zeal of protesters?
The congress government minister is responsible who took the decision of sending the rape victim to Singapore when she was medically not stable.
Think and debate how we can rid the govt of the corrupt who not only steak our assets, but also make the state dysfunctional.
Agence France-Presse/Getty Images Indian demonstrators holds placards during a protest calling for better safety for women following the rape of a student in the Indian capital, in New Delhi on December 27, 2012.

REVIEW & OUTLOOK ASIADecember 27, 2012, 11:29 a.m. ET

A Rape in Delhi

No one is addressing Indians' anxiety for law and order.


Indians are outraged after a gang-rape of a 23-year-old woman in Delhi earlier this month left the victim struggling for her life. People gathered peacefully last Saturday in Delhi, Calcutta and Hyderabad to express a variety of demands, some to show solidarity with the victim, others to clamor for speedy justice or even the death penalty for the rapists.

Elected leaders paid lip service to improving law and order, but the lack of a sense of urgency enraged some demonstrators. That was one factor leading street protests to spin out of control in Delhi, where the police locked down the city after demonstrators set fire to barricades. A mob attacked a Delhi constable, who died Tuesday.

The anger won't subside until Indians' deeper anxiety about law and order is addressed. Large parts of India are effectively lawless, partly thanks to a drastic shortage of police. India fields 140 cops for every 100,000 persons, far from the global average of 270. Cases languish in the courts for 15 years on average.


Agence France-Presse/Getty Images
Indian demonstrators holds placards during a protest calling for better safety for women following the rape of a student in the Indian capital, in New Delhi on December 27, 2012.

When they do get access to the justice system, Indians are likely to discover that it's corrupt. Home Minister Sushil Kumar Shinde now compares the Delhi protesters to Maoists, but the comparison is perhaps more apt than he realizes. In his 2007 book "Red Sun," former Journal reporter Sudeep Chakravarti tells the story of Maoist leader Sabita Kumari, who is thought to have turned rebel when she went to file a police complaint and officers asked her to provide sex in exchange.

Fairer and faster justice calls for overhauling the police and judiciary, but consider what some officials offer instead. After a previous incident, Delhi's Chief Minister Sheila Dikshit advised women not to "be adventurous." After this month's assault, a police officer in another part of the country recommended that women carry chilli powder to ward off assailants, the Guardian reported.

It's not just politicians who need to step up. An extreme form of male chauvinism is the norm in many parts of India, and civil society leaders also need to encourage change. The good news is that 20 years of rapid growth and rising living standards have opened the way to start these conversations.

Aspirations for change mean that the risk of violence rises when politicians don't keep up. Popular demands may still be amorphous, but the onus is on elected representatives to mold sentiment into a political solution. The wonder is that in a supposedly vibrant democracy no leading figure has risen to the task.

http://online.wsj.com/article/SB10001424127887324669104578205110955921672.html?mod=wsj_share_tweet#printMode
--
S. Kalyanaraman
From: Arjun
Subject: Aborting the Goddess : India's Shame
Where are the Voices of Leadership?
From ancient times India has been worshipped as Mata Bharat or Mother India. The country's very soil is therefore not just motherland but the mother goddess herself. Which makes the now notorious brutal rape and murder of the 23 year old female medical student all the more poignant.Stripped of her clothes, dignity and very essence of humanity the young lady became just another fatality in her use as a faceless tool for the sexual frustration and warped machismo of others.
This brutal sexual assault and subsequent resultant homicide which raises a few disconcerting questions regarding modern Indian society and in particular the attitude of those in power: as a on a private bus in Delhi raises a few disconcerting questions regarding modern Indian society and in particular the attitude of those in power: both in religious/spiritual and temporal realms.
Having been sexually assaulted, left for dead and finally succumbing to her fatal injuries the student could have been just one more tragic statistic High profile protests which have now warranted the belated attention of Sonia Gandhi and Prime Minister Manmohan Singh (who was caught off camera saying rather less sympathetic remarks just after his speech in which he claimed empathy).
That has the gang rape on the bus the most notorious sex crime in India this year. Yet it is astounding when one realises the almost complete silence by Hindu leaders on the subject. Swami Ramdev has been one of the very few to speak out and condemn the violent sexual assault suffered by the medical student.read on

http://www.hinduhumanrights.info/aborting-the-goddess-indias-shame/





चिदंबरम कहते हैं कि वे मूर्ख नहीं हैं। उन्हें हम मूर्ख समझने का दुस्साहस कैसे कर सकते हैं इस कुलीन तंत्र में! दरअसल मूर्ख तो हमीं हैं।

चिदंबरम कहते हैं कि वे मूर्ख नहीं हैं। उन्हें हम मूर्ख समझने का दुस्साहस कैसे कर सकते हैं इस कुलीन तंत्र में! दरअसल मूर्ख तो हमीं हैं।

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

नकद सब्सिडी मुद्दे को लेकर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान चिदंबरम ने कहा कि वे इस सवाल का हल्काफुल्का ढंग से उत्तर देने के लिए भी तैयार बैठे हैं। उन्होंने कहा, "मैं जानता हूं कि आप में से कुछ लोग मुझे मूर्ख समझते हैं, लेकिन मैं उतना मूर्ख नहीं हूं जितना आप समझते हैं।" एक किताब के विमोचन के मौके पर करुणानिधि ने शनिवार को राजनीति में चिदंबरम के उत्तरोत्तर विकास की चर्चा की थी और पूरे हर्ष के साथ उद्गार व्यक्त किया था, "धोती पहनने वाला तमिल को प्रधानमंत्री होना चाहिए।"  हम भारतीय आंखों में पट्टी डालकर दिन के उजाले को अंधेरे में बदलने में अतिशय दक्ष है और अमावस्या के गहन तम को मोमबत्ती से रोशन करने का ख्वाब देखते हैं। वित्तमंत्री पी चिदंबरम कहते हैं कि वे मूर्ख नहीं हैं। उन्हें हम मूर्ख समझने का दुस्साहस कैसे कर सकते हैं इस कुलीन तंत्र में! दिल्ली गैंगरेप के खिलाफ तेजी से उभरते क्रयशक्ति संपन्न नये मध्यमवर्ग के भारतीय वसंत बलात्कारियों को फांसी की सजा देकर वर्चस्ववादी कालेधन की मनुस्मृति व्यवस्था बदलना चाहते हैं, जबकि हाल के दशकों में मानवता के सबसे बड़े अपराधी भोपाल गैस त्रासदी, मरीचझांपी नरसंहार, सिख निधन, बाबरी विध्वंस, मणिपुरी दमनकथा, कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन,बाबरी विध्वंस, देश व्यापी दंगे और बम धमाके,गुजरात नरसंहार, मध्यभारत में आदिवासियों के खिलाफ निरंतर युद्ध के खिलाफ इस कुलीन विद्रोह को कुछ नहीं कहना। अन्ना ब्रिगेड, बाबा रामदेव और आम आदमी केजरीवाल मार्का लोकतंत्र का जो विस्तार हो रहा है, वह चिदंबरम को बतौर प्रणव मुखर्जी के स्थानापन्न नरसंहार और बहिष्कार के एजंडे को अंजाम देने में सबसे ज्यादा मददगार हो रहा है। जल जंगल जमीन और नागरिकता से बेदखली के खिलाफ जो जन विद्रोह का अनंत सिलसिला है, उसकी सत्ता ने कोई सुनवाई की है? कभी आत्महत्या को मजबूर किसानों और दम तोड़ती कृषि की परवाह है किसी को? विशेष सैन्य अधिकार कानून १९५८ से  इरोम शर्मिला के बारह साल के आमरण अनशन के बावजूदप्रभावितों को छोड़ बाकी देश के निर्वाक तमाशाई प्रतिरोधहीन जीवनदर्शन के राविन्द्रिक तेवरके साथ जारी रहना क्या बताता है? देशभर में परमाणु ऊर्जा के बहाने जो मौत का कारोबार हो रहा है, उसका क्या हिमालय की जैसे हत्या हो रही है, उसपर मौन क्यों? राजधानियों के अलावा बाकी देश में दिन प्रतिदिन सत्ता और पूंजी नारी को जो विवस्त्र करके बाजार में बेच रहा है, सरेआम जो बलात्कार हो रहा है, कारपोरेट राज, बिल्डर प्रोमोटर राज को मजबूती देने के लिए सर्वदलीय सहमति से कारपोरेट नीति निर्धारण, एक के बाद एक कानून में संशोधन, संविधान में बदलाव, सुधार के नाम पर जनविरोधी नीतियां और कालाधन की व्यवस्था, कहीं कोई विरोध हो रहा है? पढ़े लिखों के मोमबत्ती जुलूस के मुकाबले इस देश में भूखे नंगों के किसी आंदोलन की आज तक सुनवाई हुई है कहीं? बतौर वित्तमंत्री और गृहमंत्री चिदंबरम कारपोरेट राज को कामयाब करने के सबसे कामयाब शातिर खिलाड़ी हैं, उन्हें मूर्ख समझें कौन माई का लाल? दरअसल मूर्ख तो हमीं हैं।

जाहिर है कि देश की अर्थव्यवस्था को नरमी की राह से तेजी की ओर मोड़ना और भारतीय बाजार के प्रति निवेशकों का भरोसा बहाल करना नए साल में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।उम्मीद है कि वित्त मंत्री पी. चिदंबरम अगले बजट में निवेशकों के अनुकूल कुछ नए उपाय करेंगे ताकि अर्थव्यवस्था को फिर से तेजी की राह पर वापस लाने में मदद मिल सके।हालांकि, वैश्विक कारकों को देखते हुए अर्थव्यवस्था को तेजी की पटरी पर लाना सरकार और रिजर्व बैंक दोनों के लिए ही चुनौतीपूर्ण है और इसमें समय लग सकता है। चिदंबरम पहले ही कह चुके हैं कि राजकोषीय स्थिति को ठीक करने और अर्थव्यवस्था की राह में अड़चने दूर करने के लिए 'कड़वी दवाइयों' की जरूरत है।बहरहाल रेप कांड से दहली दिल्ली के बाजार भी पिछले दो हफ्ते से बेजार नजर आ रहे हैं। रीटेल बाजारों में फुटफॉल 60 फीसदी तक गिर चुकी है, जबकि बजट होटलों की ऑक्युपेंसी 70 फीसदी से घटकर 40 फीसदी पर आ चुकी है।क्रिसमस और न्यू इयर सेलिब्रेशन से गुलजार रहने वाले कई बाजारों में तो पीस मार्च और शांति प्रार्थना ने माहौल काफी गमगीन कर रखा है। ट्रेडर्स का कहना है कि किसी आपराधिक घटना के चलते कारोबार को इतना नुकसान कभी नहीं उठाना पड़ा था।

देश की आर्थिक वृद्धि दर जनवरी-मार्च तिमाही (2012) में घटकर 5.3 प्रतिशत पर आ गई जिससे वर्ष 2011.12 के दौरान जीडीपी वृद्धि दर घटकर महज 6.5 प्रतिशत रही।पूर्व वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और उनके बाद पी. चिदंबरम द्वारा आर्थिक वृद्धि दर में तेजी लाने के गंभीर प्रयास किए जाने के बावजूद अप्रैल-जून,12 की तिमाही में वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत रही और जुलाई.सितंबर तिमाही में यह फिर घटकर 5.3 प्रतिशत पर आ गई।अर्थव्यवस्था में नरमी का रुख जारी रहने की वजह से रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय दोनों ने ही वृद्धि दर के अपने अपने अनुमान घटा दिए। जहां रिजर्व बैंक ने 2012.12 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 5.8 प्रतिशत कर दिया है, वित्त मंत्रालय ने इसे 5.7 से 5.9 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान जताया है। इकॉनमी के नए तूफान में फंसने का डर बढ़ गया है। इकॉनमिस्ट्स जहां जीडीपी ग्रोथ एस्टिमेट में और कमी करने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं बॉन्ड ट्रेडर्स को डर है कि 2जी ऑक्शन के फ्लॉप रहने के बाद सरकार को मार्केट से ज्यादा लोन लेना पड़ेगा।इनफ्लेशन के हायर लेवल पर बने रहने और सितंबर में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में कमी के बाद एक्सपर्ट्स को इस फाइनैंशल ईयर में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी से कम होने की आशंका सता रही है। अप्रैल-जून क्वार्टर में जीडीपी ग्रोथ 5.5 फीसदी रही थी। इसके बाद रिकवरी के संकेत मिलने के बाद एक्सपर्ट्स ने कहा था कि इकनॉमी बॉटम आउट हो चुकी है यानी वह इस लेवल से नीचे नहीं जाएगी। एक्सिस बैंक के चीफ इकॉनमिस्ट सौगाता भट्टाचार्य ने कहा, 'सितंबर क्वार्टर में जीडीपी ग्रोथ 4.8-4.9 फीसदी रह सकती है। एग्रीकल्चर सेक्टर निराश नहीं करेगा। हालांकि, सविर्सेज से मायूसी हाथ लग सकती है। इसकी ग्रोथ सितंबर क्वार्टर में 6 फीसदी रह सकती है।' सितंबर में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन 0.4 फीसदी गिरा। वहीं, ट्रेड डेफिसिट रिकॉर्ड 21 अरब डॉलर हो गया है। अक्टूबर में रीटेल इनफ्लेशन भी बढ़कर 9.75 फीसदी हो गया, जो सितंबर में 9.73 फीसदी था। इससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिए इंटरेस्ट रेट घटाना मुश्किल हो गया है।सविर्सेज सेक्टर की हिस्सेदारी जीडीपी में 60 फीसदी है। हालांकि, ग्लोबल इकॉनमी की खराब हालत और डोमेस्टिक स्लोडाउन के चलते ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज, टूरिज्म और इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी सेक्टर्स मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में प्रोफेसर बिबेक देबरॉय ने कहा, 'जुलाई-सितंबर क्वार्टर में कंस्ट्रक्शन और टेलीकॉम को छोड़कर सर्विस सेक्टर के दूसरे सेगमेंट का परफॉर्मेंस खराब रहा है। इससे जीडीपी ग्रोथ में कमी आ सकती है। 4.9 और 5 फीसदी ग्रोथ के बीच सिर्फ सायकोलॉजिकल फर्क है। मुझे लगता है कि जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी रहेगी।'इकनॉमिक स्लोडाउन से सरकार के रेवेन्यू को तगड़ी चोट पहुंच सकती है। अगर सरकार डिसइनवेस्टमेंट या ऑक्शन से ज्यादा पैसा नहीं जुटा पाती है, तो उसके लिए 5.3 फीसदी फिस्कल डेफिसिट का टारगेट हासिल करना मुश्किल हो सकता है। जेपी मॉर्गन में इकॉनमिस्ट जहांगीर अजीज ने कहा, 'हमें डिसइनवेस्टमेंट और स्पेक्ट्रम सेल्स से जुटाए जाने वाले पैसे को लेकर सरकार के दावे पर पहले से शक था। फिस्कल डेफिसिट 5.7 फीसदी रह सकता है।' गोल्डमैन सैक्स, नोमुरा सिक्युरिटीज और आईएनजी वैश्य बैंक को भी फिस्कल डेफिसिट अनुमान से ज्यादा रहने की आशंका है। इस वजह से बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है। आरबीआई के अक्टूबर में पॉलिसी रिव्यू के बाद से 10 साल वाले बॉन्ड की यील्ड 0.03-0.05 फीसदी तक बढ़ चुकी है। बजट में इस फाइनेंशियल ईयर में सरकार ने 5.6 लाख करोड़ लोन का अनुमान लगाया था। हालांकि, माकेर्ट को लग रहा है कि यह इससे 50,000 करोड़ रुपए ज्यादा रह सकता है।

अब देखें, फिस्कल क्लिप के गहराते साये में डिजिटल बायोमैट्रिक नागरिकता आधारित बहिस्कार की कैसी चाक चौबंद व्यवस्ता बन रही है। अमेरिकी संसद में अस्थाई समझौता हो गया। पर भारत में सारे आर्थिक संकेतक लाल निशान पर है। मुद्रस्पीति और मंहगाई बेलगाम। उत्पादन में लागातार गिरावट,​​ कृषि चौपट। वित्तीय घाटा रिकार्ड बनाने में सचिन तेंदुलकर। विदेशी कर्ज अबाध पूंजी की कारपोरेट नीते के चलते सुरसामुखी। रक्षा ब्यय राष्ट्र के सैन्यीकरण के साथ लगातार अनियंत्रित, राजनीतिक वजह से सरकारी खर्च बेहिसाब। पर सरकार को कैश सब्सिडी के जरिये नागरिक निजता , संप्रभुता की हत्या  के जरिये ही जादू की छड़ी की तलाश है। चिदंबरम के बोल पढ़े लिखों के लिए वेद वाक्य है, विशिष्ट वर्ग के हक में मनुस्मृति व्यवस्था   कायम रहे, तो ​​कुलीनतंत्र से सबसे लाभान्वित मलाईदार तबके को क्या नुकसान बाकी हम तो इस आर्थिक खेल को समझने की कोशिश ही नहीं करते।

अमेरिका के फिस्कल क्लिफ का हल निकलने से बाजारों में जोश बढ़ता दिखा। सेंसेक्स करीब 200 अंक चढ़ा और निफ्टी 5960 के ऊपर पहुंचा। फिलहाल बाजारों पर ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली का थोड़ा दबाव आया है।दोपहर 1:35 बजे, सेंसेक्स 154 अंक चढ़कर 19580 और निफ्टी 44 अंक चढ़कर 5949 के स्तर पर हैं। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.5 फीसदी और बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 1 फीसदी चढ़े हैं।अमेरिकी सीनेट ने फिस्कल क्लिफ डील को मंजूरी दे दी है। फिस्कल क्लिफ डील के तहत सरकार के खर्चों में कटौती और टैक्स में बढ़ोतरी का प्रस्ताव 2 महीने तक टलेगा। अमेरिकी सीनेट में 89 वोटों के साथ फिस्कल क्लिफ डील को मंजूरी मिली है। वहीं फिस्कल क्लिफ के विपक्ष में 8 वोट पड़े। इस मंजूरी के बाद अमेरिकी फ्यूचर्स में 3 फीसदी की जोरदार तेजी है।फिस्कल बिल के तहत इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 4-4.5 लाख डॉलर हो सकती है। मध्यम वर्ग के लिए टैक्स में छूट जारी रह सकती है। साल 2013 में बेरोजगारी बीमा जारी रह सकता है। एस्टेट टैक्स 35 फीसदी से बढ़कर 40 फीसदी हो सकता है।मेबैंक किम एंग सिक्योरिटीज के पी के बसु का कहना है कि फिस्कल क्लिफ सुलझना भारत और अन्य बाजारों के लिए बेहद पॉजिटिव खबर हो सकती है। फिस्कल क्लिफ पर समाधान निकलने से रिस्क एसेट में बड़े पैमाने पर पैसा आने की उम्मीद है। हालांकि फिस्कल क्लिफ डील की बारिकियों पर नजर रखना जरूरी है, जो बेहद अहम है।

आधी-अधूरी तैयारियों के बावजूद सरकार ने आज 1 जनवरी से देश के केवल 20 जिलों में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम लॉन्च कर दिया है। पहले इसे 51 जिलों में इसे शुरू करने का प्लान था। स्कीम के पहले फेज़ में देश के 20 जिलों में 2 लाख लोगों के बैंक खाते में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर किया जाएगा। इसके बाद 1 फरवरी से 11 और जिलों को इस स्कीम के दायरे में लाया जाएगा। बाकी के 12 जिले 1 मार्च से कवर किए जाएंगे।इस बारे में सोमवार को फाइनैंस मिनिस्टर पी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार इस स्कीम को लेकर बेहद सावधानी बरत रही है और इसके हर फेज पर नजर रखी जाएगी। 1 मार्च तक कुल 43 जिलों को इस स्कीम के तहत लाया जाएगा। उन्होंने कहा, 'फूड, फर्टिलाइजर और केरोसीन के लिए डायरेक्ट सब्सिडी ट्रांसफर के बारे में अभी नहीं सोचा जा रहा है। इस पर फैसला लेने में अभी वक्त लगेगा, क्योंकि यह काफी गंभीर मसला है।'


दिल्ली दुष्कर्म पर मचे बवाल पर चीन के एक प्रभावशाली अखबार ने अपनी आलोचनात्मक टिप्पणी में कहा है कि भारत का "अक्षम और विषम लोकतंत्र" सामाजिक बुराइयों का हल मुहैया नहीं करा सकता। दिल्ली दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, "भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था जाहिर तौर पर इस प्रकार की समस्याओं का हल नहीं करती, बल्कि इन्हें वैधानिकता प्रदान करती है।" अखबार के लिए लिन सू ने अपने लेख में लिखा है, "भारतीय लोकतंत्र अब कुछ चुनिंदा कुलीनों और हितसाधक समूहों के हाथों की कठपुतली होकर रह गया है। इसी ने देश में मौजूदा विरोध प्रदर्शनों और अगस्त महीने में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को बल दिया।" सू ने नई दिल्ली की सड़कों पर चल रहे प्रदर्शन को चीन के लिए एक सबक बताया है।

दिल्ली गैंगरेप मामले के चलते नए साल के मौके पर भी जंतर-मंतर पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने के लिए लोगों का जुटना जारी है। मौसम का सबसे सर्द दिन होने के बावजूद सुबह से ही यहां लोग आ रहे हैं। जंतर-मंतर पर बीते आठ दिनों से एक शख्स राजेश गंगवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आज उनकी भूख हड़ताल का नौवां दिन है। गौरतलब है कि भीषण ठंड के बावजूद यहां लोग जुटे हुए हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रदर्शनकारी सिर्फ और सिर्फ इंसाफ की मांग कर रहे हैं।

दिल्ली में 23 वर्षीय पैरा मेडिकल स्टूडेंट से गैंगरेप की घटना ने आम भारतीय का ही नहीं देश का भी सिर नीचा किया है। पड़ोसी चीन के मीडिया ने इस घटना को लेकर भारत के समाज और सिस्टम पर एक तरह से 'ताना' कसा है। अखबार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस तरह की घटनाएं भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली और राष्ट्र की अक्षमता का दिखाती हैं। रिपोर्ट में चीनी विश्लेषक के हवाले से लिखा गया है कि भारत आर्थिक विकास में चीन से करीब एक दशक पीछे है और सामाजिक विकास में तीन दशक पीछे चल रहा है।

दिल्ली में रविवार 16 दिसंबर की रात चलती बस में गैंगरेप की शिकार 23 वर्षीय छात्रा की सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के बाद शनिवार तड़के मौत हो गई थी। चीन का अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, 'भारत में महिलाओं का उत्पीड़न चौंकाने वाला है।' उसने लिखा है, 'नई दिल्ली में 2011 में बलात्कार के 572 मामले आए और पिछले 40 सालों में इनकी संख्या में सात गुना बढ़ोतरी हुई है।'

अखबार ने 'भारतीय बलात्कार मामले स्त्री-पुरुषों के बीच वास्तविक समानता का अभाव दिखाता है' हेडिंग के साथ लिखा है कि इससे तो समस्या का एक बहुत छोटा पहलू ही सामने आया है। अखबार ने लिखा है, 'छह दशक पहले चीन और भारत का विकास स्तर एक जैसा था, लेकिन चीन द्वारा सुधारों को लागू करने और अपनी सीमाएं खोलने के बाद अंतर काफी बड़ा हो गया है।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, 'हालांकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत को उसकी बेहतर प्रणाली के लिए पश्चिम में महान संभावनाओं से युक्त माना जाता है। लेकिन एक अक्षम और असमान लोकतंत्र अपनी संभावनाओं का उचित उपयोग नहीं कर सकता है।'

लेखक ने कहा है, "छह दशक पहले चीन और भारत समान विकास दर वाले देश थे, लेकिन चीन के सुधार कार्यक्रम शुरू करने और खुलापन लाने के बाद दोनों में भारी अंतर आ गया। विश्लेषण करने पर पता चलता है कि आर्थिक विकास के लिहाज से भारत, चीन से एक दशक पीछे और सामाजिक विकास के लिहाज से तीन दशक पीछे है।"

लेख में यह भी कहा गया है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत को पश्चिम में इसकी व्यवस्था के कारण अत्यंत संभावनाशील की निगाह से देखा जाता है। लेकिन, एक अक्षम और विषम लोकतंत्र इस संभावना का दोहन करने में सक्षम नहीं होता।

भारत सरकार की आलोचना धीमी प्रतिक्रिया के लिए की जाती है और देश की कानून लागू करने वाली पद्धति लापरवाह मानी जाती है।

अखबार ने लिखा है कि भारत में अदालतों तक पहुंचे दुष्कर्म के मामलों में 26 प्रतिशत में ही सजा हो पाती है। इसके अलावा देश की महिलाओं को दोयम दर्जे का बनाने वाली परंपरागत समाजिक संस्कृति की निंदा की जानी चाहिए।

लोकतंत्र राष्ट्रीय राजनीति और सरकार की निगरानी में लोगों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करे। प्रभावी लोकतंत्र का दायरा चुनावी राजनीति से कहीं ज्यादा बड़ा होता है। अपने धुर विचारों के लिए माने जाने वाले ग्लोबल टाम्स ने नई दिल्ली में 2011 में 572 दुष्कर्म की घटनाओं का आंकड़ा पेश करते हुए कहा है कि बीते 40 सालों में देश में दुष्कर्म की घटनाओं में सातगुनी वृद्धि हुई है।

सरकार आर्थिक विकास दर को बढ़ाने के लिए रिफॉर्म पर जोर दे रही है। मार्केट में रौनक वापस लौटाने और डिमांड में तेजी लाने के लिए प्रयास जारी है। ऐसे में वह कई महत्वपूर्ण फैसले इस साल ले सकती है। ऐसे में आर्थिक सेक्टर में कुछ फैसले आम लोगों को राहत देंगे।

ब्याज दरों में कटौती: सरकार और आरबीआई जनवरी या मार्च में ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू कर सकते हैं। बैंकिंग एक्सपर्ट के अनुसार साल 2013-14 में ब्याज दरों में आधे से एक प्रतिशत की कटौती होने की संभावना है।

सब्सिडी वाले सिलिंडरों की संख्या बढ़ेगी: सरकार नए साल में लोगों को सब्सिडी वाले सिलिंडर बढ़ने की खुशखबरी दे सकती है। दबाव के चलते वह इसकी संख्या को छह से बढ़ाकर नौ करने का प्रस्ताव है। सूत्रों के अनुसार पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद ने इस पर सहमति की मुहर लगा दी है।

कैश सब्सिडी का विस्तार: नए साल से डायरेक्ट कैश सब्सिडी स्कीम का लाभ गरीब और लाभार्थियों को सीधे तौर पर मिलना शुरू हो जाएगा। सरकार की योजना 2013 के अंत तक अधिकतर जिलों में इसे लागू करने की है।

शेयरों में तेजी, सोने में नरमी: जनवरी में सरकारी कंपनियों के शेयरों की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। इससे शेयर मार्केट का सेंटिमेंट सुधरेगा। डीएसई के पूर्व प्रेसिडेंट बी.बी. साहनी के अनुसार शेयर मार्केट के लिए नया साल काफी माकूल रहने की संभावना है। शेयर मार्केट में सुधरने की खबर से सोने में उतार-चढ़ाव आना शुरू हो गया है। अगर इंटरनैशनल लेवल पर निवेशक शेयरों की तरफ गए तो सोने में गिरावट आना तय है।

पेंशन और इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई: सरकार बजट में पेंशन सेक्टर में एफडीआई की अनुमति और इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने संबंधी विधेयक पारित कर सकती है। इससे शेयर मार्केट के साथ इंश्योरेंस मार्केट में मनी फ्लो में तेजी आने की उम्मीद है।

जीएसटी और डीटीसी पर फैसला: गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स के साथ डायरेक्ट टैक्स कोड को सरकार किसी भी हालत में नए साल में लागू करने की कोशिश में है। इससे मार्केट में वस्तुओं की आवाजाही आसान होगी। वहीं आम आदमी के लिए इनकम टैक्स स्लैबों में परिवर्तन होगा। इसका सीधा असर निवेश पर पड़ेगा।

चिदंबरम ने बताया कि विधानसभा चुनावों के चलते सरकार गुजरात और हिमाचल प्रदेश के 8 जिलों के लिए डायरेक्ट ट्रांसफर स्कीम के लिए बेसिक फ्रेमवर्क नहीं तैयार कर पाई है, इसलिए शुरुआत में 43 जिलों में ही इसे लॉन्च करने की योजना है।

उन्होंने आगे कहा, 'सभी 26 स्कीम रोलआउट के लिए तैयार हैं। 1 जनवरी को जिन सात स्कीम्स में भुगतान (सेलेक्टेड 20 जिलों के) करना बाकी है, डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर सिस्टम के जरिए वहां पेमेंट कर दिया जाएगा। इसके लिए यूआईडीएआई प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल होगा।' 1 जनवरी से जिन सात स्कीम्स को भुगतान के तैयार किया गया है, उनमें एससी, एसटी और ओबीसी के लिए प्री और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप, इंदिरा गांधी मातृत्व सहायता योजना, धनलक्ष्मी स्कीम और एससी-एसटी बेरोजगारों के लिए स्टाइपेंड शामिल हैं।

वित्त मंत्री ने बताया कि लाभार्थियों के पास आधार नंबर न होने पर भी उनके बैंक खातों में सब्सिडी भेज दी जाएगी। उन्होंने कहा, 'अगले कुछ दिनों या हफ्तों में हमारा मकसद 100 फीसदी आधार लाभार्थियों तक पहुंचना है।' सरकार विदड्रॉल अरेंजमेंट को मजबूत बनाने के लिए बैंकिंग सिस्टम को भी तैयार कर रही है। चिदंबरम ने बताया कि इन 43 जिलों की 7,900 बैंक ब्रांचेज़ में ऑनसाइट एटीएम होंगे। बैंकों ने 20 लाख इंटर-ऑपरेबल माइक्रो-एटीएम के टेंडर भी मंगाए हैं। इनमें बायोमीट्रिक स्कैनिंग और आधार अथॉन्टिकेशन के लिए फसिलिटीज़ होंगी। वित्त मंत्री ने कहा कि शुरुआत में इस स्कीम को चलाने में कुछ तकनीक दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन जो अधिकारी इसकी देख-रेख में लगे हुए हैं, वे धीरे-धीरे इन्हें दुरुस्त कर लेंगे।

आठ बुनियादी उद्योगों का उत्पादन घटा

उद्योगों के आठ बुनियादी क्षेत्रों में नवंबर माह में वृद्धि की दर १.८ फीसद घटा। बीते साल के इसी माह में यह ७.८ फीसद की थी। कोयला, प्राकृतिक गैस व सीमेंट के उत्पादन में गिरावट के कारण यह कम रही है। सबसे ज्यादा नुकसान सीमेंट के उत्पादन में रहा। यह ०.२ फीसद घटा, जो इसके पूर्व वर्ष की समीक्षाधीन अवधि में १७ फीसद बढ़ा था। अक्टूबर माह में इन आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर ६.५ फीसद की थी। इन उद्योगों में नवंबर माह में गिरावट का कारण ऊपर दर्शाई चीजों के उत्पादन में गिरावट तो है ही साथ ही बिजली, स्टील और पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन भी कम रहा है। सोमवार को यहां जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार आठ उद्योगों में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस सीमेंट, कोयला, बिजली, स्टील, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों, उर्वरकों के समग्र विस्तार में अप्रैल से नवंबर माह के दौरान ३.५ फीसद की गिरावट आई है। इससे पूर्व वर्ष में यह इस दौरान ४.८ फीसद का था। आठ उद्योगों का वजन औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में ३७.९ फीसद का रहा है। प्राकृतिक गैस और कोयले का उत्पादन क्रमशः १५.२ फीसद और ४.४ फीसद घटा। सीमेंट का उत्पादन ०.२ फीसद घटा, जबकि बीते वर्ष की समान अवधि में यह १७ फीसद ज्यादा था।

आर्थिक सुधारों से 2013 में बढ़ेगा निवेश

वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के चलते निवेश में नरमी आने से सरकार को 2012 में एफडीआई नीति में ढील देने को बाध्य होना पड़ा जिसका असर 2013 में एफडीआई में तेज बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिल सकता है।

विपक्षी दलों के भारी विरोध के बावजूद सरकार ने बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र, एकल ब्रांड खुदरा क्षेत्र, जिंस एक्सचेंज, बिजली एक्सचेंज, प्रसारण, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों और परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई नीति उदार की।

इस साल के 10 महीनों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 33 प्रतिशत तक घटकर 21 अरब डॉलर पर आ गया जो बीते साल की इसी अवधि में 31 अरब डॉलर था।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में एक अधिकारी ने हालांकि उम्मीद जताई कि कई महत्वपूर्ण निर्णयों को देखते हुए 2013 में देश में और एफडीआई आ सकता है।

इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने कहा कि सरकार को अधिक निवेश हासिल करने के लिए और सुधार करने होंगे। उन्होंने कहा, 'वर्ष 2012 वैश्विक एवं घरेलू कारकों से अच्छा नहीं रहा, लेकिन 2013 में चीजों में सुधार आने की उम्मीद है।'

महीनों तक नीतिगत निर्णय लेने में लाचार रहने के आरोप का सामना करने वाली सरकार ने बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देकर निवेशकों में उत्साह पैदा की।

साथ ही उसने विमानन क्षेत्र में विदेशी विमानन कंपनियों को 49 प्रतिशत निवेश करने की भी अनुमति दी। इसके अलावा, प्रसारण क्षेत्र में एफडीआई सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी गई और साथ ही बिजली एक्सचेंजों में विदेशी निवेश की अनुमति दे दी गई। सरकार ने प्रसारण क्षेत्र में डीटीएच जैसी कंपनियों में एफडीआई सीमा बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को सरकार से बगैर पूर्व मंजूरी लिए कमोडिटी एक्सचेंजों में 23 प्रतिशत तक निवेश करने की भी अनुमति दे दी गई। वहीं, संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों में एफडीआई सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी गई।

इस समय देश में 14 संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियां परिचालन कर रही हैं जिनमें से 9 कंपनियों में विदेशी निवेश नहीं है।

इस दौरान, सरकार ने घटिया मशीनों के आयात को हतोत्साहित करने के लिए पुरानी मशीनों के आयात के बदले इक्विटी देने की सुविधा वापस ले ली।

दीर्घकालीन दृष्टि के तहत औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने 2017 तक वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाकर 5 प्रतिशत पहुंचाने का लक्ष्य रखा है जो 2007 में 1.3 प्रतिशत था।

2011-12 में 40 अरब डॉलर बाहरी कर्ज बढ़ा

देश का बाह्य कर्ज मार्च 2012 को समाप्त वित्त वर्ष में 39.9 अरब डॉलर बढ़कर 345.8 अरब डॉलर रहा। उच्च वाणिज्यिक उधारी तथा गैर-प्रवासी भारतीयों का जमा बढ़ने से देश का बाह्य कर्ज बढ़ा है।वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार मार्च 2011 को समाप्त वर्ष में देश का बाह्य ऋण 305.9 अरब डॉलर था। बाह्य कर्ज देश के निवासियों की देनदारी को बताता है।बयान के अनुसार वाणिज्यिक कर्ज, अल्पकालिक ऋण तथा गैर-प्रवासी भारती जमा में वृद्धि से कर्ज बढ़ा है।

हर भारतीय पर 14,699 रुपए का विदेशी कर्ज

देश के प्रत्येक व्यक्ति पर औसतन 14 हजार 699 रुपए का विदेशी कर्ज है। लोकसभा में भीष्म शंकर के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा ने यह जानकारी दी।

मंत्री ने बताया कि भारत ने 2011-12 के दौरान सरकारी खातों पर ऋण के रूप में 22,836 करोड़ रुपए प्राप्त किए हैं। इस अवधि में विभिन्न द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय एजेंसियों से अनुदान के रूप में 2,872 करोड़ रुपए प्राप्त किये हैं। जापान, जर्मनी, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन भारत को बड़े द्विपक्षीय ऋणदाता हैं।

मीणा ने कहा कि 2011-12 के दौरान जर्मनी से।,536 करोड़ रुपए का ऋण एवं अनुदान प्राप्त हुआ जबकि अमेरिका से 55.10 करोड़ रुपए का अनुदान मिला। जापान से 6,083 करोड़ रुपए, रूस से 35.92 करोड़ रुपए और ब्रिटेन से।,689 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ।

वित्तीय घाटा 4.12 लाख करोड़ रु पर पहुंचा

अप्रैल-नवंबर के दौरान वित्तीय घाटे का आंकड़ा 4.12 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इसप्रकार, सरकार ने वित्त वर्ष 2013 के बजटीय आवंटित 5.13 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 80.4 फीसदी खर्च कर दिया है।

इस साल नवंबर महीने में वित्तीय घाटे में गिरावट देखने को मिली है। साल दर साल आधार पर नवंबर में वित्तीय घाटा 46,400 करोड़ रुपये से घटकर 45,000 करोड़ रुपये रहा। नवंबर में सरकार का टैक्स कलेक्शन भी बढ़ गया है।

सालाना आधार पर नवंबर में सरकार का टैक्स कलेक्शन 48,100 करोड़ रुपये से बढ़कर 57,600 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। नवंबर में सरकार की कमाई बढ़ी है। सालाना आधार पर सरकार की कमाई 34,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 43,200 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है।

हालांकि नवंबर में सरकार के खर्चों में भी बढ़ोतरी दिखी है। सालाना आधार पर सरकार का खर्चा 80,300 करोड़ रुपये से बढ़कर 88,200 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार के राजस्व घाटे में भी कमी आई है। सालाना आधार पर सरकार का राजस्व घाटा 37,400 करोड़ रुपये से घटकर 34,200 करोड़ रुपये हो गया है।

इस बीच सूत्रों का कहना है कि सरकार को भरोसा है कि वो वित्त वर्ष 2013 के लिए 5.3 फीसदी के वित्तीय घाटे को हासिल कर लेगी। साथ ही वित्त वर्ष 2013 में विनिवेश का लक्ष्य भी हासिल करने का भरोसा है। हालांकि वित्त वर्ष 2013 में स्पेक्ट्रम से हासिल होने वाली आय में गिरावट आ सकती है। स्पेक्ट्रम से होने वाली आय में आने वाली 15,000-20,000 करोड़ रुपये की कमी को पूरा कर लिया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक सरकार के पास अच्छी खासी नकदी मौजूद है। साथ ही सरकार ने अब वित्त वर्ष 2013 के लिए लक्ष्य के मुताबिक कम खर्च करने का फैसला किया है।

उच्च आर्थिक वृद्धि को बेहतर भुगतान संतुलन जरूरी : प्रणब

हैदराबाद : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि 12वीं योजना में उच्च आर्थिक वृद्धि लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार को भुगतान संतुलन के मोर्चे पर बेहतर स्थिति बनाये रखने के ठोस उपाय करने होंगे।

मुखर्जी ने आज यहां एक समारोह में कहा, 'मेरा मानना है कि यह सही फैसला है कि आठ प्रतिशत के आसपास का कुछ महत्वकांक्षी लक्ष्य वृद्धि लक्ष्य रखा गया है जो हासिल हो सकता है।' हालांकि, उन्होंने कहा, 'लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि यदि अभी सुधारात्मक उपाय नहीं किये गये तो भुगतान संतुलन संकट बढ़ सकता है। वित्त मंत्रालय और योजना आयोग को इसका ध्यान रखना होगा।'

सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012 से 2017) के लिये सालाना औसत आठ प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कल नयी दिल्ली में हुई राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में योजना को मंजूरी दे दी गई। राष्ट्रपति ने कहा कि 12वीं योजना के दौरान सकल पूंजी निर्माण जीडीपी का 37 प्रतिशत अनुमानित किया गया है और इसमें कहा गया है कि इसके लिये 35.1 प्रतिशत संसाधन सकल घरेलू बचत और 2.9 प्रतिशत विदेशी समर्थन से जुटाये जाएंगे।

नए साल में शेयरबाजार चमकाएंगे किस्मत, देंगे अच्छा रिटर्न

साल 2013 की शुरुआत जोरदार तेजी के साथ हुई है। सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी तेजी देखी जा रही है। खराब शुरुआत के बावजूद साल 2012 में सेंसेक्स ने 26 फीसदी और निफ्टी ने 28 फीसदी का रिटर्न दिया है। ऐसे में 2013 की शानदार शुरुआत के बाद पूरे साल में बाजार कैसा रिटर्न देगा और किन सेक्टरों, शेयरों में निवेश से मिलेगा मुनाफा, इस पर बाजार के जानकारों ने अपनी राय दी है।

आईआईएफएल के चेयरमैन निर्मल जैन का कहना है कि साल 2013 में सेंसेक्स और निफ्टी 15-20 फीसदी का रिटर्न दे सकते हैं। फिस्कल क्लिफ पर सहमति बन जाने से भारतीय बाजारों को भी फायदा मिल सकता है।

2012 में एफआईआई निवेशकों ने अच्छा पैसा बनाया हालांकि घरेलू रिटेल निवेशकों ने ज्यादा कमाई नहीं की लेकिन 2013 में रिटेल निवेशकों के भी अच्छी कमाई करने की उम्मीद है। 2013 में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों मे तेजी रहेगी। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में 25-30 फीसदी मुनाफा मिल सकता है।

2013 में एफआईआई निवेश बढ़ेगा। घरेलू बाजार में 1.5 लाख करोड़ डॉलर आने की उम्मीद है। अगर सरकार रिफॉर्म की राह पर और आगे बढ़ती है तो विदेशी पैसे की आमद में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

निर्मल जैन के मुताबिक अगर डीजल के दामों में हर महीने 1 रुपये की बढ़त होती है तो वित्तीय घाटा कम हो सकता है। वहीं जीएसटी लागू होना बाजार के लिए सकारात्मक होगा। इंश्योरेंस और बैंकिग संशोधन बिल की दिशा में कदम बढ़ने से इससे जुड़े सेक्टर प्रभावित होंगे। डायरेक्ट कैश सब्सिडी की योजना ठीकठाक रही तो सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम हो सकता है।

2013 में ब्याज दरों में कमी आने की पूरी उम्मीद है। इससे ऑटो, बैंकिंग सेक्टर को फायदा मिलेगा। निवेशक अच्छे निजी बैंकों में पैसा लगा सकते हैं। सरकारी बैंकों को पूंजी जुटाने में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसके चलते निजी बैंकों में निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

निवेशक ऑटो शेयरों, एफएमसीजी, आईटी, फार्मा, सीमेंट शेयरों में निवेश कर सकते हैं। ऑइल एंड गैस सेक्टर की कुछ कंपनियों जैसे बीपीसीएल में पैसा लगाया जा सकता है। हालांकि इंफ्रा और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करने से पहले सावधानी बरतने की जरूरत है।

साल 2013 में खराब विदेशी माहौल और घरेलू राजनीतिक उठापठक के चलते बाजार में गिरावट आ सकती है। अगर किन्हीं कारणों से चुनाव समय से पहले हो जाते हैं तो बाजार को झटका लग सकता है।

निवेशक अच्छे शेयरों को बेचने की बजाए उनमें निवेश बनाए रखें। निवेशक थोड़ा थोड़ा निवेश करने की रणनीति अपनाएं और बाजार में एक्सपोजर बनाए रखें। सोना और फिक्सड इन्कम उपकरणों में भी निवेश रखा जा सकता है। निवेशक एसआईपी के जरिए निवेश करें।

दारशॉ के रीगन एफ होमावजीर का कहना है कि निफ्टी मार्च 2013 तक 6300 के स्तर छू सकता है। अगर निफ्टी में 6300 का स्तर पार हो जाता है 7500 का स्तर देखा जा सकता है।

मौजूदा तेजी में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी आने की उम्मीद है। फाइनेंशियल शेयरों में तेजी आने की उम्मीद है। एसबीआई 3500 का स्तर जल्द छू सकता है। वहीं पिडिलाइट छोटी अवधि में 500 रुपये का स्तर छू सकता है। हिंडाल्को में 160 रुपये का स्तर जल्द ही देखा जा सकता है। वहीं शेयर में 200 रुपये का लक्ष्य रखें। इमामी में पहला लक्ष्य 800 रुपये और दूसरा लक्ष्य 1100 रुपये का होगा। करूर वैश्य बैंक में आगे चलकर अच्छा पैसा बनाया जा सकता है।

हेलियस कैपिटल के फंड मैनेजर समीर अरोड़ा का कहना है कि अमेरिका में नरम मौद्रिक नीति भारत के लिए फायदेमंद हो सकती है। कमजोर ग्रोथ के अनुमान के चलते बाजार में जो गिरावट आनी थी वो पहले ही आ चुकी है।  

घरेलू बाजार में निजी बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फार्मा और आईटी सेक्टर में निवेश करने की सलाह दी जा रही है। रुपये में गिरावट एक चिंता का विषय बना रहेगा। 2012 में रुपये पर दबाव के चलते भारत में निवेश करने वाले फंड के रिटर्न में कमजोरी देखी गई है।

समीर अरोड़ा के मुताबिक अगर आरबीआई ने दरों में कटौती नहीं की तो बाजार को निराशा हो सकती है। 2013 में कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ 14-15 फीसदी रह सकती है।

जियोस्फर कैपिटल मैनेजमेंट के मैनेजिंग पार्टनर अरविंद सांगेर के मुताबिक फिस्कल क्लिफ का मुद्दा सुलझने के बाद कर्ज पर अंकुश लगाना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती होगा।

2013 में भारत में बजट, नीतियों का लागू होना और महंगाई पर काबू पाना बाजार के लिए अहम कारक होंगे। अगर रिफॉर्म के कदम अच्छे से उठाए जाते हैं तो इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर शेयरों में तेजी आ सकती है।

अरविंद सांगेर के मुताबिक अगर आरबीआई 2013 में दरें कम करता है तो कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी हो सकती है। अगर चीन के बाजारों में रिकवरी होती है तो भारतीय बाजारों में एफआईआई पैसा कम हो सकता है।

वाह, नए साल में मिलेंगी 10 लाख नई नौकरियां

अनिश्चित आर्थिक हालात के बावजूद देश में अगले वर्ष एफ् एमसीजी और रिटेल समेत विभिन्न क्षेत्रों में दस लाख रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

रोजगार सलाहकार सेवा उपलब्ध करने वाली कंपनी 'माई हायरिंग डॉट कॉम' की ओर से कराए गए ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक वर्ष 2013 नौकरी के लिहाज से समृद्धशाली वर्ष रहेगा। मौजूदा वर्ष जहां देश में करीब 7 लाख रोजगार के नए अवसर का अनुमान लगाया गया था वहीं अगले वर्ष यह आंकडा करीब 10लाख रहेगा।

सर्वेक्षण में 12 उद्योग क्षेत्रो से जुडी करीब 4450 कंपनियों को शामिल किया गया था। हालांकि सर्वेक्षण नतीजों के मुताबिक रोजगार के सभी नए अवसर संगठित क्षेत्र में होंगे। सबसे ज्यादा नौकरियां एफ्एमसीजी और रिटेल क्षेत्र में मिलेंगी इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवा, सूचना प्रौद्योगिकी और सत्कार क्षेत्र में भी रोजगार के बड़े अवसर उपलब्ध होंगे। सरकार की ओर से नए बैंकिंग लाइसेंस जारी करने के फ्सैले से इस क्षेत्र में भी बडी संख्या में नियुक्तियां होंगी।

खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति से कयी विदेशी कंपनियों के देश में आने से इस क्षेत्र में भी रोजगार के बडे अवसर आएंगे1वर्ष 2012 की तुलना में इस क्षेत्र में 15 से 20 प्रतिशत अधिक रोजगार आने का अनुमान है। सर्वेक्षण के मुताबिक यदि सबकुछ अनुमान के मुताबिक सही चला तो एफएमसीजी, रिटेल और सत्कार क्षेत्र देश में सबसे ज्यादा नौकरियों के अवसर पैदा करेगा।