Sunday, August 23, 2015

मीडिया सत्ता के हक में लामबंद मीडिया जनता के हक हकूक के खिलाफ मीडिया बेदखली का पैरोकार मीडिया में मुक्त बाजार की जय जयकार हैरत भी नहीं कि मी़डिया बेदखल कैंपस में होक कलरव क खिलाफ लामबंद पलाश विश्वास

मीडिया सत्ता के हक में लामबंद

मीडिया जनता के हक हकूक के खिलाफ

मीडिया बेदखली का पैरोकार

मीडिया में मुक्त बाजार की जय जयकार

हैरत भी नहीं कि मी़डिया बेदखल कैंपस में

होक कलरव क खिलाफ लामबंद

पलाश विश्वास

মুখ্যমন্ত্রীর উপস্থিতিতে প্রেসিডেন্সি বিশ্ববিদ্যালয়ে ছাত্রছাত্রীদের ওপর বর্বরোচিত পুলিশী হামলার প্রতিবাদে শনিবার এস এফ আই-এর মিছিল...... Students LATHICHARGED in presence of the CM.Procession on Saturday in KOLKATA.

ডিগবাজি খাওয়ায় বছরের সেরা বাঙালি কে ?? অভীকদা নাকি সুমন দা ??

Vanish Ganatantra's photo.


कौन अखबार किस भाषा में बात कर रहा है,पाठक से बेहतर जानता नहीं है कोई।


कौन अखबार कब कब बदला है ऐन मौके पर,पाठक से बेहतर जानता नहीं है कोई।


दर्शक की नजर में हम्माम मे सारे के सारे नंगे हैं।

फिरभी शर्मोहया की दीवारें अपनी जगह थीं,जो अब ढह रही है।

फासीवाद के रंग चाहे हो रंग बिरंगी चेहरे सारे एक हैं।

जनता से बेहतर कोई न जाने है।


जनता को मालूम है कि जो बी हो जिस भी पार्टी या विचारधारा का,उसके हक में कोई नहीं है और न उसके हकहकूक का हिसाब कहीं होना है और नउसकी सुनवाई कहीं है।


जनता अब मजे के लिए अखबार पढ़ती है।

मीडिया अब मनरंजन का सर्वोत्तम माध्यम है।

हम जैसे गुलाम लोगों के लिए भी यह बेहद पीड़ा का कारण है।


नौकरी के चंद महीने अभी बाकी हैं।

हम ेक्सटेंसन के मोहताज भी नहीं हैं।

जैसे हमारा प्रमोशन हुआ नहीं है,जाहिर है कि हमारा एक्सटेशन बी होने वाला नहीं है।


सच कहने के लिए अगर एक्सप्रेस समूह मुझे नौकरी से निकाल फेंके अभी इसी वक्त तो भी मुझे परवाह नहीं है।


कम वक्त नहीं बिताया हमने यहां।बसंतीपुर की गोबर माटी से सने नैनीझील के ठीक ऊपर डीएसबी कालेज में दाखिला लेने के साथ साथ मध्य झील पर उनियाल साहब के दैनिक पर्वतीय में हाईस्कूल पास करते ही 1973 से लगातार लगातार कागद कारे कर रहा हू।अविराम।नौकरियां करने लगा 1980 से।कोलकाता में एक्सप्रेस समूह की सेवा में हूं 1991 से।1980 में झारखंड घूमने के बहाने दैनिक आवाज में लैंड करने के बजाय मीडिया का मतलब हमारे लिए एकमात्र पक्ष जनपक्ष का रहा है।जीना भी यहीं ,मरना भी यहीं।इसके सिवाय जाना कहीं नही है।


मीडिया में दिवंगत नरेंद्र मोहन से बदनाम कोई मालिक संपादक हुा कि नहीं,मुझे मालूम नहीं है।उन नरेंद्र मोहन ने मुझे बिना अपायंटमेंट लेटर मेरठ जागरण में खुदा बनाकर रखा और जिन्हें मैं मसीहा मानता रहा,उनने मुझे कुत्ता बनाकर रखा।


जबतक मेरठ में मैं रहा।1984 से लेकर 1990 तक घर घर जाकर इंटर पास बच्चों को भी मैंने पत्रकार बनाया है।जो भी भर्ती हुई है,विज्ञापन मैंने निकाले।परीक्षा मैंने ली।कापियां मैंने जांची।भर्ती के बाद उन्हें ट्रेन और ग्रुम भी मैंने किया।यह नरेंद्र मोहनजी की मेहरबानी थी।उने कभी दखल नहीं दिया।चाहे हमारी सिफारिश पर किसी का पैसा न बढ़ाया हो लेकिन अखबार में क्या छारपें न छापें,यह फैसला उनने हम संपादकों पर छोड़ा है हमेशा।

जब नैनीताल की तराई में महतोष मोड़ सामूहिक बलात्कार कांड हो गया शरणार्थियों की जमीन हथियाने के लिए,रोज मैं जागरण के सभी संस्करणों में पहले पन्ने पर छपता था।


मुख्यमंत्री थे मेरे ही पिता के कास मित्र नारायणदत्त तिवारी जिनके खिलाफ पहाड़ और तराई एकजुट आंदोलन कर रहा था।सारे उत्तरप्रदेश में,हर जिले में और यूपी से भी बाहर तिवारी के इस्तीफे की मांग गूंज रही थी।उस दरम्यान कम से कम तीन बार उन्हीं लरेंद्र मोहन से तिवारी ने मुझे फौरन निकालने के लिए कहा थाय़यूं तो तिलवारी से नरेंद्र मोहन के मधुर संबंध थे और तिवारी से हमारे भी पारिवारिक रिश्ते थे।न मैंने रिस्तों की परवाह की और न नरंद्रमोहन ने।उनने साफ मना कर दिया तीनों बार।


हमने आदरणीय प्रभाष जोशी और ओम थानवी के खिलाफ लागातार लिखा है।बदतमीजियां की हैं।लेकिन एक्सप्रेस में इतनी आजादी रही है कि किसी ने कभी मुझसे जवाबतलब नहीं किया कि क्यों लिखते हो या किसी ने कभी मना भी नहीं किया लिखने को।समयांतर में लगातार थानवी की आलोचना होती रही और समयांतर में मैं लगातार लिखता रहा।


थानवी से मुंह देखादेखी बंद थी।लेकिन थानवी ने कभी न मुझे रोका न टोका।उनकी रीढ़ के बारे में तो मैं लिख ही रहा था।क्यों लिख रहा था,जिन्हें अब भी समझ में न आया, वे बाद में समझ लें।


मीडिया वही है।हम भी वही है।

मीडिया पर कोई पाबंदी है नहीं।

आपाकाल ने साबित कर दिया कि चीखों को रोकने की ौकात हुकूमत की होती नहीं है हरगिज।

बार बार साबित हो गया है कि आजाद लबों को हरकतों से रोक सके,ऐसी औकात न बाजार की है और न हुकूमत की है।भले सर कलम कर लें।



मुक्त बाजार और विदेशी पूंजी के हक में वफादारी वजूद का सवाल भी हो सकता है।इतनी लागत है,इतना खर्च है और मुनाफा भी चाहिए तो बाजार के खिलाफ हो नहीं सकते।


यह हम बखूब समझते हैं और जिंदगी में नौकरी से फुरसत मिलने पर इसीलिए कमसकम अखबार निकालने का इरादा नहीं है।


मीडिया सत्ता की भाषा बोल रहा है है और जुबां पर कोई पहरा है नहीं दरअसल।न आपातकाल कहीं लगा है।सत्ता ने किसी को मजबूर किया हो,ऐसी खबर भी नहीं है।


बाजार का हुआ मीडिया ने सत्ता को भी अपना लिया है।और मडिया अब बेदखल कैंपस में हमारे बच्चों के खिलाफ है।


बेदखल कैंपस में बच्चों के कत्लेआम की तैयारी है।


फिलहाल ताजा स्टेटस यह है कि इंडियन एक्सप्रेस और जनसत्ता ने म से कम खबर जो है,तस्वीरे जो हैं,वही लगायी है।यह हमारे लिए राहत की बात है।बाकी मीडिया छात्रों को अपराधी बनाने लगा है।


क्योंकि हमारे बच्चे हमारे हक हकूक के लिए लड़ रहे हैं और कैंपस बेदखल करने लगा है फासीवाद जिसतरह, प्रतिरोध उससे तेज है।दमन उससे भी कहीं तेज है और हमारे बच्चे सुरक्षित नहीं है।शर्म करो लोकतंत्र।

मीडिया का फोकस हालांकि एफटीआईआई के कैंपस पर हैं लेकिन देशभर में विश्वविद्यालयों के कैंपस बेदखल हो रहे हैं और फासीवाद ने इन विश्वविद्यालयों की घेराबंदी कर दी है।छाकत्र बेहद बहादुरी से लड़ रहे हैं।जादवपुर विश्वविद्यालय के होक कलरव की गूंज दुनियाभर में हुई है।होक कलरव और शहबाग एकाकार है।खास तौर पर बंगाल और दक्षिण भारत के कैंपस में फासीवादी सत्ता और मुक्त बाजार के किलाफ प्रतिरोध बेहद तेज है और खबर कही नहीं है।मीडिया सत्ता के साथ मिलकर होक कलरव को अभव्य कलरव बनाने लगा है।


जादवपुर विश्वविद्यालय में उपकुलपति ने पुलिस बुलवाकर छात्र छात्राओं को पिटवाया,गिरफ्तार करवाया ,जिसके खिलाफ होक कलरव की शुरुआत हुई।


तो सत्ता ने फिर एफटीआईआई पुणे में महाभारत रच दिया और कुरुवंश की तरह छात्रों के किलाफ सफाया अभियान देश भर में चालू रिवाज बन गया है।


ताजा मामला कोलकाता के विश्वप्रसिद्ध प्रेसीडेसी विश्वविद्यालय का है जहां मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पार्टीबद्ध गुंडों और पुलिस ने छात्रों को धुन डाला और उपकुलपति मुस्कुराती रही।


छात्रों के धरना प्रदर्सन से बेरवाह मुख्यमंत्री कैंपस दखल के लिए इफरात खैरात नकद डाल गयीं और आंदोलनकारी छात्रों की परवाह किये बिना,उन्हें शामिल किये बिना जबरन दीक्षांत समारोह भी  हो गया।


चूंकि प्रेसीडेंसी में छात्रों ने मुख्यमंत्री क काले झंडे दिखाये तो इसके बदले में प्रेसीडेंसी में शामिल जादवपुर और बाकी बंगाल और बाकी देश के होक कलरव की नाकेबंदी पुलिस और पार्टीबद्ध गुंडों ने की है और पूरे बंगाल में,खासतौर पर कोलकाता में फासीवादी झंडे फहराने के लिए कैंपस की जबरदस्त नाकेबंदी है।आंदोलन जारी है।


छात्र देश भर में एफटीआईआई महाभारत के विरोध में हैं।

छात्र अंध राष्ट्रवादी केसरियाकरण के खिलाफ है।

छात्र आर्थिक सुधारों के खिलाफ हैं।

छात्र किसानों की खुदकशी के खिलाफ हैं।

छात्र देश जोड़ने,दुनिया जोड़ने और दिलों को जोड़ने का बीड़ा उठा चुके हैं और अब उनकी खैर नहीं है।

कैंपस में भी कत्लेआम की तैयारी है।

मीडिया होक कलरव के खिलाफ है।

आनंद बाजार समूह में फिर शामिल हो गयी हैं दीदी।


यही नजारा दक्षिण भारत के कैंपस में है,ऐसा आनंद तेलतुंबड़े का कहना है लेकिन खबर या तो सिरे से नहीं है या फिर सारी खबरें सत्ता और सियासत के हक में हैं।

हमारे बच्चे कतई सरक्षित नहीं हैं।


मीडिया सत्ता के हक में लामबंद.

मीडिया जनता के हक हकूक के खिलाफ

मीडिया बेदखली का पैरोकार

मीडिया में मुक्त बाजार की जय जयकार

हैरत भी नहीं कि मी़डिया बेदखल कैंपस में

होक कलरव क खिलाफ लामबंद


INDIAN EXPRESS Reports:

Students let 'unwell' Presidency University V-C leave campus

The call to boycott given by a section of protesting students failed to cast shadow over the convocation ceremony.

Kolkata | Published:August 23, 2015 12:13 am

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Students 'gherao' the V-C at her office, Saturday. (Source: Express Photo by Subham Dutta)

Presidency University Saturday held its third convocation amid high drama and presence of heavy police force even as the 26-hour-long gherao of its Vice-Chancellor Anuradha Lohia ended after she was allowed by the protesting students to leave the campus over her deteriorating health.

The students, however, insisted on her resignation. "We decided to let her leave the campus since she was unwell, but our protests will continue. We will continue to occupy the office until she resigns," Trisha Chanda, general secretary of the students union, said.

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The call to boycott given by a section of protesting students failed to cast shadow over the convocation ceremony.

The mood at the university campus was divided as many students shouted 'we want convocation' while others shouted slogans demanding the V-C's resignation over alleged police assault on students protesting during Chief Minister Mamata Banerjee's visit to campus Friday.

During her convocation speech, Lohia said, "We were faced with rather unpleasant incidents in the past 24 hours. But I must say every challenge is an opportunity and my dear faculty and students stood by me and made sure that nothing marred the convocation…"

http://indianexpress.com/article/cities/kolkata/students-let-unwell-presidency-university-v-c-leave-campus/

অশালীন বিক্ষোভ উড়িয়ে সমাবর্তনে পড়ুয়ারা

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উপাচার্যকে ঘেরাও করে রেখে সমাবর্তন অনুষ্ঠান নিয়ে অনিশ্চয়তা তৈরি করেছিলেন বিক্ষোভরত পড়ুয়ারা। শুক্রবার বিকেল থেকে শনিবার সন্ধে পর্যন্ত ছাত্রছাত্রীদের বিক্ষোভ, হই-হট্টগোলের বিরামও ছিল না। কিন্তু সে সব পাশ কাটিয়েই এ দিন বিকেলে প্রেসিডেন্সি বিশ্ববিদ্যালয়ের সমাবর্তন অনুষ্ঠান হয়েছে।

নিজস্ব সংবাদদাতা

২৩ অগস্ট, ২০১৫

বিক্ষোভ সত্ত্বেও সমাবর্তন

Presidency University Vice-Chancellor Anuradha Lohia's medical check-upছাত্র বিক্ষোভের মধ্যেই সুষ্ঠুভাবে হল প্রেসিডেন্সি বিশ্ববিদ্যালয়ের তৃতীয় সমাবর্তন। ডিরোজিও হলে সমাবর্তনের মূল অনুষ্ঠানে শুক্রবার বিকেল থেকে চলা ছাত্র বিক্ষোভের কোনও আঁচই লাগেনি। তবে ছাত্ররা তাঁদের দাবি, উপাচার্যের পদত্যাগের দাবিতে এখনও আন্দোলন চালিয়ে যাওয়ার সিদ্ধান্ত নিয়েছেন। ছাত্রদের এই অযৌক্তিক আন্দোলনকে কড়া ভাষায় সমালোচনা করেছেন বিশ্ববিদ্যালয়ের আচার্য তথা রাজ্যপাল কেশরীনাথ ত্রিপাঠী। এ ব্যাপারে তিনি উপাচার্য অনুরাধা লোহিয়ার নেওয়া সিদ্ধান্তকে সমর্থনও জানান। সমাবর্তনের পর ছাত্র বিক্ষোভ নিয়ে প্রশ্ন করলে আচার্য বলেন, যা হয়েছে তা ঠিক হয়নি। ছাত্রদের এই আচরণকে কোনও মতেই সমর্থন করি না। ছাত্ররা এখানে পড়তে আসে বিক্ষোভ দেখাতে নয়। সরাসরি প্রেসিডেন্সির ছাত্র বিক্ষোভের সমালোচনা না করলেও সমাবর্তনে আসা পদ্মভূষণ উপাধি পাওয়া বিশিষ্ট অধ্যাপক পি বলরাম শিক্ষাপ্রতিষ্ঠানে ছাত্র বিক্ষোভের নিন্দা করেন। বলেন, শিক্ষাঙ্গনে শিক্ষার চর্চা ছাত্রদের ফিরিয়ে আনতে হবে। উপাচার্য তাঁর বক্তবে‍্য শুক্রবার বিকেল পাঁচটা থেকে চলা ঘেরাও বিক্ষোভ প্রসঙ্গে বলেন, গত ২৪ ঘণ্টা ধরে বিশ্ববিদ্যালয়ে ঘটা অবাঞ্ছিত ঘটনা সত্ত্বেও সবাই সমাবর্তন অনুষ্ঠানে এসেছেন। এতে এটাই প্রমাণিত হয়, অধিকাংশ ছাত্রছাত্রী, শিক্ষক–শিক্ষিকারা আমার সঙ্গে আছেন। যারা আমার সঙ্গে আছে তাদের ধন্যবাদ জানাই। ছাত্রছাত্রী ও শিক্ষক–শিক্ষিকাদের সমর্থন না থাকলে সমাবর্তন সফল হতে পারত না।

ছাত্র বিক্ষোভের জেরে শুক্রবার বেকার বিল্ডিং দিয়ে ট্যাক্সি করে বেরতে বাধ্য হন শিক্ষামন্ত্রী পার্থ চ্যাটার্জি। শনিবার অবশ্য তিনি সমাবর্তন অনুষ্ঠানে আসেন রাজ্যপালের গাড়িতে চেপে। শুক্রবার বিকেল থেকেই প্রেসিডেন্সিতে উপাচার্যকে ঘেরাও করে রেখে শুরু হয় পড়ুয়াদের আন্দোলন। যা রাতভর চলে। বিশ্ববিদ্যালয়ে তাঁর নিজের ঘরেই পড়ুয়াদের হাতে ঘেরাও হয়ে থাকেন উপাচার্য। ছিলেন রেজিস্ট্রার দেবজ্যোতি ঘোষ ও কয়েকজন শিক্ষক। পড়ুয়াদের অভিযোগ, মুখ্যমন্ত্রী মমতা ব্যানার্জি যখন ক্যাম্পাস ছেড়ে বেরিয়ে যাচ্ছেন তখন পু‍্লিস তাঁদের মেরেছে। বিশ্ববিদ্যালয় তাঁদের নিরাপত্তা দিতে ব্যর্থ হয়েছে তাই তাঁরা উপাচার্যের পদত্যাগ চান। যদিও তাঁদের অভিযোগ ও দাবির যৌক্তিকতা নিয়েই প্রশ্ন রয়েছে। আন্দোলন নিয়ে দ্বিধাবিভক্ত বিশ্ববিদ্যালয়ের পড়ুয়ারাও। একটা অংশের পড়ুয়ারা এই আন্দোলনের সঙ্গে নেই।

শনিবার বিক্ষোভরত পড়ুয়াদের তরফে সমাবর্তন অনুষ্ঠান বয়কটের ডাক দেওয়া হয়। উপাচার্যের সামনে এসে সমাবর্তন বয়কট করার পোস্টারও ঝোলানো হয়। দফায় দফায় আন্দোলনের গতিপ্রকৃতি নিয়ে নিজেদের মধে‍্য আলোচনার পর উপাচার্যের সামনে এসে চিৎকার করে স্লোগান দিতে দেখা যায় পড়ুয়াদের। সেই সময় উপাচার্য বলেন, পুলিসের সঙ্গে পড়ুয়াদের ধস্তাধস্তিতেতে আমি কি করব? দায়িত্বজ্ঞানহীন আন্দোলন। এটা দুর্ভাগ‍্যজনক যে এই ছাত্রছাত্রীদের নামের আগে প্রেসিডেন্সি লেখা থাকবে। এই আন্দোলন এবার বাড়িতে পৌঁছে যাবে। বাড়ির লোকজন কি শেখাচ্ছে এদের? কিছু পড়ুয়ার জন্য সমাবর্তন বন্ধ হবে না। আমি ঘেরাও থাকলেও সমাবর্তন হবে। আমি কোনও ভুল করিনি। পদত্যাগ করব না। ছাত্রছাত্রীদের স্লোগান ও হই–হল্লার মাঝে এক শিক্ষকের সঙ্গে বিরক্ত উপাচার্যকে 'আকাশ ভরা সূর্য তারা'ও গাইতে দেখা যায়। এর পর দুপুর তিনটের কিছু পরে হঠাৎই একাংশ ছাত্র, শিক্ষক ও আধিকারিকরা ব্যারিকেড করে উপাচার্যকে তাঁর ঘর থেকে বার করে নিয়ে আসেন। শুক্রবারও উপাচার্যের সঙ্গে কথা কাটাকাটির সময় শালীনতার মাত্রা ছাড়িয়েছিলেন বিক্ষোভরত পড়ুয়াদের কেউ কেউ। এই সময়ও উপাচার্যের উদ্দেশে পড়ুয়াদের কুকথা বলতে শোনা যায়। ডিরোজিও হলে যাওয়ার সময় পোর্টিকোয় তাঁর গাড়ির সামনে বসে পড়েন পড়ুয়ারা। পরে অবশ্য তাঁরা উঠে যান। মূলত যে ছাত্ররা উপাচার্যের গাড়ির সামনে বসে পড়েছিলেন তাঁরা যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের ছাত্রছাত্রী।

শুক্রবার রাত থেকেই তাঁরা প্রেসিডেন্সিতে জড়ো হয়েছিলেন। অনেকে সারারাত ছিলেন বলেও জানা গেছে। পাঁচটা নাগাদ সমাবর্তনে যোগ দিতে রাজ্যপাল যখন প্রেসিডেন্সিতে আসছেন তখনও পোর্টিকোতে বসেছিলেন আন্দোলনকারীরা। রাজ্যপালের গাড়িতেই আসেন শিক্ষামন্ত্রী। আন্দোলনরত ছাত্র–ছাত্রীদের দু'পাশে সরিয়ে দিয়েই রাজ্যপালের গাড়ি ঢোকার রাস্তা করে দেয় পুলিস। সমাবর্তনে বিশিষ্ট জ্যোতিপদার্থবিদ জয়ন্তবিষ্ণু নারলিকারকে ডি এসসি সম্মান জানায় বিশ্ববিদ্যালয়। তাঁর ভাষণে রাজ্য সরকারের পাশাপাশি প্রেসিডেন্সির উপাচার্য অনুরাধা লোহিয়ার নেতৃত্বদানের ভূয়সী প্রশংসা করেন রাজ্যপাল। মূল অনুষ্ঠানের পর নিজের ঘরে ফিরে আসেন উপাচার্য। যেখানে তখনও বসেছিলেন আন্দোলনরত পড়ুয়ারা। পরে সাড়ে সাতটা নাগাদ তিনি বিশ্ববিদ্যালয় ছেড়ে বেরিয়ে যান। ছাত্ররা জানিয়েছেন উপাচার্যের পদত্যাগের দাবিতে তাঁরা অনড়। এটা নিয়ে কনভেনশনের আয়োজন করা হবে। এবং যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের আদলে প্রেসিডেন্সির পড়ুয়াদের মতামত নেওয়া হবে যে তাঁরা এই উপাচার্যকে চান কি চান না। পাশাপাশি তাঁরা আরও জানিয়েছেন উপাচার্যকে বিশ্ববিদ্যালয়ে ঢুকতে তাঁরা বাধা দেবেন।

http://aajkaal.in/kolkata/%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B7%E0%A7%8B%E0%A6%AD-%E0%A6%B8%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%AC%E0%A7%87%E0%A6%93-%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%A4/


প্রেসিডেন্সিতে এসে ছাত্রছাত্রীদের বিক্ষোভের মুখে পড়লেন মমতা

www.anandabazar.com/.../প-র-স-ড-ন-স-ত-এস-ছ-ত-রছ-ত-র-দ-র-ব-ক-ষ-...

এর মধ্যেই প্রেসিডেন্সির ছাত্রছাত্রীদের সঙ্গে এসে যোগ দেন যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের 'হোক কলরব' আন্দোলনের অনেক সদস্যই। উপাচার্যের পাশে বসা রেজিস্ট্রারকে অকথ্য ভাষায় গালাগালি করতে দেখা যায় বিক্ষোভকারীদের। কেউ কেউ সিগারেট ধরিয়ে ধোঁয়া ছাড়তে থাকেন। আজ, শনিবার বিশ্ববিদ্যালয়ের তৃতীয় সমাবর্তন অনুষ্ঠান। সে কারণেই কর্তৃপক্ষ ...


  

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