| Saturday, 22 June 2013 10:15 |
प्रतिभा शुक्ल नरोरा में गंगा पर काम कर रहीं साध्वी समर्पिता का कहना है कि उत्तराखंड में नदी की व्याकुलता फूटी है। हमने बांध से, सुरंग से, प्लास्टिक से, प्रदूषण से और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से नदियों की सांसे रोक दीं। नदी आकाश और भूतल से ऊर्जा लेती है। सुरंग में डालने से नदी का आकाश से संपर्क टूटता है। नदी का स्वाभाविक वाष्पीकरण बाधित होता है। बांध से बनी झील में अथाह गाद से उसका पाताल से सहज संपर्क खत्म हो जाता है। भूतल का पानी नाले, कचरे, प्लास्टिक से विषैला हो चुका है। नदी में गाद से जरा सी बारिश में तुरंत बाढ़ आ जाती है। फिर तबाही मच जाती है। यह नदी की अकुलाहट है, जिसे हमें समझना ही होगा। |
Saturday, June 22, 2013
टिहरी बांध टूटा तो दिल्ली तक मचेगी तबाही
टिहरी बांध टूटा तो दिल्ली तक मचेगी तबाही
http://www.jansatta.com/index.php/component/content/article/1-2009-08-27-03-35-27/47498-2013-06-22-04-46-18
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