Wednesday, August 7, 2013

हमरी यूपी पे बा लागल रामा केकर ई नजरिया द्रोपदी अस लूटल जाला देख एके बीच बजरिया

पढ़िए एक भोजपुरी गीत 

हमरी यूपी पे बा लागल रामा केकर ई नजरिया 
द्रोपदी अस लूटल जाला देख एके बीच बजरिया 

लूट पाट के राज ई कईसे कहावे समाजबादी?
चारों ओर हहकार मचल फैलल बा बरबादी
गुंडा खाएं बिरयानी अउर जनता भुख्ख्ल सोवे 
चोरवा पीटे घूम घूम के 'जागल रह' मुनादी 

बिकल कलमिया मंच सजावे जागल जाए जेलिया 
जयप्रकास सर पीटत होइहें औरु रोवत होइंहे लोहिया 

बिजुरी नइखे चुल्हेभाड में जाए ई लपटपवा 
नोकरी नइखे भाग भाग सब जाए कलकतवा 
नेतवन संघे घूम्मे वाला काटे खूब मलाई
पढ़ लिख चिरकुट बनके घूमे एम ए पसवा 
मन में सपना अइसे सूखे जइसे खेत में उंखिया 
नटई रेते रोवहु ना दे अइसन जबर मिलल कसइया 

पंजा त अब नहसुर बन गईल बिपदा बेटा-माई 
हथिया वाला आई त गुंडन के नमवे भर बदलाई 
फुलवा वाला त घूम घूम के घर घर आग लगाई
हंसुआ-हथौड़ा के का कहीं केतना बा मोरचाइल

केसे करीं हम उम्मीद के अब लड़ पाई इ लड़ईया 
आव आव अब उठाव ललका झंडा गिरल बा भूइयां
 — with Ashutosh Kumar and7 others.

No comments:

Post a Comment