Thursday, June 20, 2013

दुनिया का सबसे बड़ा बाँध चीन में बनेगा

दुनिया का सबसे बड़ा बाँध चीन में बनेगा


Китай река лодка
फ़ोटो: EPA

हाल ही में चीन के पर्यावरण सुरक्षा मंत्रालय ने सिचुआन सूबे में दादुख़े नदी पर शुआनज्यानकौ बाँध के निर्माण के सवाल पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की।

यह बाँध दुनिया का सबसे ऊँचा बाँध होगा। इसकी ऊँचाई 314 मीटर होगी। ज़मीन के भीतर पनबिजलीघर बनाने तथा उसको चलाने के लिए बड़ी संख्या में सुरंगें बनाई जाएँगी। चीन के पर्यावरण सुरक्षा मंत्रालय ने यह बात मानी है कि इस बाँध के निर्माण से पर्यावरण को कुछ नुक़सान तो पहुँचेगा ही, इसके अलावा बड़ी संख्या में बाँध के क्षेत्र से और डूब-क्षेत्र से कई हज़ार लोगों को विस्थापित भी करना पड़ेगा। लेकिन इसके बावजूद बाँध के निर्माण की इजाज़त दे दी गई है।

 

दादुख़े नदी सिचुआन प्रान्त के पश्चिमी इलाके में बहती है और आगे जाकर मिनज्यान नदी में गिर जाती है। मिनज्यान नदी को चीन की सबसे बड़ी नदी यान्त्सी की सहायक नदी माना जाता है। दो गीगावाट शक्ति का शुआनज्यानकौ पनबिजलीघर साल भर में क़रीब आठ अरब किलोवाट घण्टे बिजली का उत्पादन किया करेगा। इसलिए इस परियोजना को पुनर्नवीकरण स्त्रोतों से ऊर्जा प्राप्त करने के कार्यक्रम का महत्त्वपूर्ण दौर माना जा रहा है। इस कार्यक्रम के अनुसार वर्ष 2020 तक चीन में इस्तेमाल की जाने वाली कुल 15 प्रतिशत बिजली का उत्पादन पुनर्नवीकरण स्त्रोतों से ही होना चाहिए।

 

चीन के पर्यावरण सुरक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि इस परियोजना से कई क़िस्मों की दुर्लभ मछलियों की संख्या-वृद्धि में बाधा पड़ेगी और कई प्रकार की वनस्पतियों का भी ख़ात्मा हो जाएगा। इनमें चीनी यू या चीनी थुनेर के वृक्ष भी शामिल हैं। लेकिन बाँध और बिजलीघर के निर्माण की इस परियोजना में कुछ निवारक क़दमों को उठाने की भी चर्चा की गई है तथा बाँध के डूब-क्षेत्र से स्थानीय निवासियों के विस्थापन की भी योजना बनाई गई है, इसलिए चीन के पर्यावरण सुरक्षा मंत्रालय ने इस बाँध के निर्माण को अपनी स्वीकृति दे दी है।

 

इस परियोजना को हालाँकि चीन के लिए महत्त्व रखने वाली परियोजना ही माना जाना चाहिए क्योंकि दादुख़े नदी से आगे मिलने वाली सारी नदियाँ चीन में ही बहती हैं और इनका किसी दूसरे देश से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन इस परियोजना का गम्भीर दीर्घकालीन असर चीन के पड़ोसी देशों पर भी पड़ सकता है। रेडियो रूस के विशेषज्ञ और रूस के सामरिक अध्ययन संस्थान के एक विद्वान बरीस वलख़ोन्स्की ने कहा :

 

मैं अपनी बात यहाँ से शुरू करना चाहता हूँ कि प्राकृतिक सन्तुलन को भंग करने वाली बड़ी परियोजनाओं के कुपरिणामों की कोई सीमा नहीं होती है। यान्त्सी नदी पर बनाए गए एक दूसरे विशाल बाँध 'तीन घाटियाँ' का अनुभव दिखाता है कि इन बाँधों के बनने से भूस्खलनों और भूकम्पों का ख़तरा काफ़ी बढ़ जाता है। 'तीन घाटियाँ' बाँध दुनिया का सबसे विशाल बाँध है और ऐसे इलाके में बना हुआ है, जहाँ भूकम्प का ख़तरा हमेशा बना रहता है।

 

सिचुआन प्रान्त का पश्चिमी हिस्सा तिब्बत से जुड़ा हुआ है। और म्याँमार, भारत, बंगलादेश, भूटान और नेपाल जैसे देश तिब्बत से बहुत दूर नहीं हैं। तिब्बती भूमि की सिंचाई के लिए पश्चिमी चीन में बाँध का निर्माण करने की विशाल योजनाएँ बाँध क्षेत्र से बहुत नीचे बसे हुए भारत और बंगलादेश जैसे देशों में बेचैनी पैदा कर रही हैं। रेडियो रूस के विशेषज्ञ बरीस वलख़ोन्स्की ने

कहा :

 

पनबिजली से जुड़ी परियोजनाओं के क्षेत्र में चीन की नीतियाँ किसी एकाधिकारवादी देश की नीतियों की तरह हैं। एशिया की अधिकतर नदियों के उद्गम स्थल और ऊपरी इलाके चीन में ही हैं। लेकिन इन नदियों से कम से कम तीन अरब लोगों का जीवन सीधे-सीधे जुड़ा हुआ है। चीन उन देशों के हितों की पूरी तरह से उपेक्षा कर देता है, जहाँ इन नदियों का निचला हिस्सा है। चीन अगर इस सवाल पर कोई दुपक्षीय बातचीत करता भी है तो उसमें दूसरे पक्ष के ऊपर दबाव डालने और पुट्ठे दिखाने की नीति अपनाने लगता है। बहुपक्षीय बातचीत करने से तो वह पूरी तरह से बचता है और ऐसा करने से इन्कार कर देता है। हिन्दचीन के देशों के द्वारा बनाए गए मेकोंग नदी आयोग के काम में उसने कोई रुचि ही नहीं ली। ब्रह्मपुत्र नद, जिसे चीन में यारलुंग सांगपो कहकर पुकारा जाता है, के पानी के उपयोग के सवाल पर वह भारत और बंगलादेश के साथ बात नहीं करना चाहता और इरतिश नदी के ऊपरी बहाव के पानी के इस्तेमाल के सवाल पर वह कज़ाख़स्तान के साथ तो बातचीत करने को तैयार है, लेकिन इरतिश नदी के निचले हिस्से में स्थित रूस के साथ बात करने से वह कतराता है।

 

इस तरह हम कहना यह चाहते हैं कि शुआनज्यानकौ बाँध जैसी कोई भी विशाल परियोजना उन सभी देशों का ध्यान आकर्षित करती है, जो उससे प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि पर्यावरण सम्बन्धी कुपरिणामों के अलावा इस तरह की परियोजना चीन अपनी उन अन्य नदियों पर भी बना सकता है, जो दूसरे देशों से होकर गुज़रती हैं, तब इसका सीधा-सीधा असर चीन के पड़ोसी देशों की जल-सुरक्षा पर पड़ेगा।

No comments:

Post a Comment