गौतम देव ने ज्योति बसु की आड़ ली अपने बचाव के लिए
गौतम देव ने सीआईडी अफसरों के सवालों के जवाब में यह खुलासा किया कि चंदन बसु की कंपनी के साथ राज्य आवासन पर्षद का जो गठजोड़ हुआ,वह तत्कालीन सरकार की नीतियों क तहत ही हुआ।अच्छा हुआ कि इस सवाल जवाब का सीधा प्रसारण उनकी शर्त के मुताबिक नहीं हुआ,वरना आम माकपाई फिर उनके बचाव में खड़े नहीं होते।
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
माकपा के पूर्व मेंत्री गौतम देव ने भवानी भवन में पेश होकर सीआईडी विभाग के अफसरों को आवास घोटाले के सिलसिले में अपनी सफाई पेश की है। स्पष्ट वक्ता बतौर पहचाने वाले गौतम देव ने अधिकांश सवालों को टाल दिया और कुछ सवालों के जवाब में अपने दिवंगत नेता पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु की आड़ ली अपने बचाव के लिए।विवादित फैसलों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराकर। कामरेड बसु अपनी सफाई देने के लिए पेश नहीं हो सकते। माकपा के धुरंधर नेता की दक्षता पर शक की सुई घूमने लगी है कि उन्हें अपने बचाव के लिए आखिरकार बसु का नाम लेना पड़ा।जबकि यह नैतिकता का मामला भी है।माकपा के लिए उनके एक शीर्ष नेता ,जिसे पिछले चुनावों में बुद्धदेव के अवसान के बाद मुख्यमंत्रित्व का दावेदार समझा जा रहा था और यकीनन विधानसभा चुनाव जीत जाते तो वे विपक्ष के नेता भी होते सूर्यकांत मिश्र की जगह, के लिए यह रवैया कम शर्मनाक नहीं है।गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के बेटे को खास रियायत देने के मामले में गौतम देव ने पूछताछ के दौरान अपनी कोई भूमिका होने से इंकार किया है। जबकि खुद चंदन बसु ने वाम जमाने में ज्योति बसु के बेटे की हैसियत का फायदा उठाने के आरोपों का खंडन किया है। लेकिन गौतम देव ने चंदन का समर्थन किये बिना कह दिया कि चंदन की कंपनी को बिना निविदा जमीन देने का फैसला मंत्रिमंडल का था,उनका नहीं।गौतम देव ने सीआईडी अफसरों के सवालों के जवाब में यह खुलासा किया कि चंदन बसु की कंपनी के साथ राज्य आवासन पर्षद का जो गठजोड़ हुआ,वह तत्कालीन सरकार की नीतियों क तहत ही हुआ।अच्छा हुआ कि इस सवाल जवाब का सीधा प्रसारण उनकी शर्त के मुताबिक नहीं हुआ,वरना आम माकपाई फिर उनके बचाव में खड़े नहीं होते।
वैसे गौतम देव के बचाव में पूरा पार्टी संगठन खड़ा हो गया है। जब उनकी भनवानी भवन में पेशी हो रही थी, तब भवन के बाहर हजारों की तादाद में पार्टी समर्थक अपने नेताओं की अगुवाई में उनके समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे। माकपा नेताओं का आरोप है कि उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई की जा रही है। लेकिन अपने बचाव के लिए जिसतरह गौतम देव ने बसु का नाम लिया और खुद को पाक साफ बताया,उससे उन्होंने अनचाहे वामजमाने में प्रोमोटरों बिल्डरों को दी गयी जमीन के तमाम मामलों को संदिग्ध बना दिया है। जनता में तो यही संदेश जायेगा कि दाल में जरुर कुछ काला है।माकपा के शासनकाल में 20 करोड़ रुपये के आवासन घोटाले की जांच के सिलसिले में सीआइडी ने पूर्व आवासन मंत्री गौतम देव को पूछताछ के लिए सीआइडी मुख्यालय भवानी भवन में हाजिर होने का निर्देश दिया। सीआईडी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व आवास मंत्री एवं माकपा नेता गौतम देव से तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार और रियल एस्टेट कंपनी के बीच हुए संयुक्त उद्यम में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर शुक्रवार को पूछताछ की।
यह सवाल किये जाने पर कि सीआईडी ने उनसे क्या पूछा, देव ने जवाब दिया, ''सीआईडी को संतुष्ट करना मेरा काम नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चाहती थी कि सीआईडी भवानी भवन में मुझे दो घंटे तक रोके। लिहाजा उन्होंने मुझे दो घंटे तक रखा।'' देव ने यहां सीआईडी मुख्यालय में उनसे दो घंटे तक चली पूछताछ के बाद यह बात कही।
इस बीच सीआईडी अधिकारियों ने पूछताछ के ब्यौरों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। इस वर्ष के शुरू में राज्य आवास विभाग ने तालतल्ला पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज करवायी थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि बंगाल ग्रीनफील्ड हाउसिंग डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के लेनेदन में बड़ी वित्तीय अनियमितता पायी गयी।
यह कंपनी उन आठ रियल एस्टेट फर्मों में शामिल है जिनके साथ वाम मोर्चा सरकार ने संयुक्त उद्यम किया था। वाम मोर्चा के अध्यक्ष विमान बोस ने तृणमूल शासन पर आरोप लगाया था कि वह गलत मामले दर्ज कर माकपा नेता एवं पूर्व मंत्रियों को परेशान कर रहा है।
जबकि इससे पहले उनके तेवर कुछ और ही थे,लेकिन बावनी भवन से वे सीआईडी अफसरों के अफसरों की तारीफ करते हुए निकले।मालूम हो कु कुछ ही दिनों पहले पूर्व आवास मंत्री गौतम देव ने बाकायदा शर्त रखी थी कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यदि सीआईडी की उनसे पूछताछ का सीधा प्रसारण करती है तो वह सीआईडी मुख्यालय जाएंगे। देव ने आवास परियोजना में धांधली पर सीआईडी की चिट्ठी को तृणमूल सरकार का प्रेम पत्र बताया और चुनौती दी कि धांधली साबित करने के लिए मुख्यमंत्री को कागज का एक टुकड़ा भी नहीं मिलेगा। देव ने शनिवार को एक निजी बांग्ला टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में यह बातें कही। उन्होंने कहा कि सीआईडी मुख्यालय जाने के लिए वह तैयार हैं बशर्ते कि मुख्यमंत्री पूछताछ के सीधे प्रसारण की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि सीआईडी इस मामले में कुछ नहीं कर सकती। अंत में मामला कोर्ट में जाएगा और अदालत में ही बताना पड़ेगा कि सीआईडी से उनको क्यों नोटिस भेजी गयी और इसके पीछे क्या राजनीतिक उद्देश्य है। देव ने कहा कि लंबे समय के वाममोर्चा के शासन में यदि कुछ भ्रष्टाचार हुआ भी है तो ममता बनर्जी ही अकेले ईमानदार नहीं हैं। सिर्फ वह( गौतम) मुकुल, मदन और कुणाल ही चोर नहीं हैं, बल्कि ममता बनर्जी भी चोर हैं। वह खुद को ईमानदारी का प्रतीक नहीं बता सकती। सीआईडी को पता करना चाहिए कि दो वषरें में ममता के परिवार ने कितनी संपत्ति बनाई है। देव ने कहा कि न्यूटाउन में हाउसिंग परियोजना में किसी तरह की धांधली नहीं हुई है। सरकार ने साझा परियोजना में कुछ आवासीय योजनाओं को मूर्त रूप दिया और इसमें किसी को लाभ नहीं पहुंचाया गया है। सब कुछ नियम कानून के तहत हुआ है। आज मुख्यमंत्री को कोई भी काम करने के लिए न्यूटाउन ही जाना होगा। राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री और 13 मुख्यमंत्रियों ने न्यूटाउन की प्रशंसा की है। दुनिया में यह अपनी तरह का अनोखा शहर है।
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