छत्तीसगढ़ में सुकमा जिले में सामसेट्टी गाँव में दो हज़ार सात में गाँव की छह आदिवासी लड़कियों के साथ पुलिस के जवानों , विशेष पुलिस अधिकारियों और सरकार की मदद से चलाए जाने वाले सलवा जुडूम के नेताओं ने सामूहिक बलात्कार किया था . इन लड़कियों ने पुलिस थाने में जाकर अपने साथ हुए अपराध के बारे में थाने में रिपोर्ट दर्ज़ कराने की कोशिश करी . लेकिन चूंकि पुलिस अधिकारी ही इस अपराध में शामिल थे इसलिये इन महिलाओं की शिकायत पुलिस ने नहीं लिखी .
प्रचंड नाग shared Himanshu Kumar's photo.
यह महिलायें हमारी संस्था द्वारा चलाए जाने वाले मुफ्त कानूनी केन्द्र में आयी और मदद मांगी . हमने जिले के पुलिस अधीक्षक को इसकी लिखित शिकायत भेजी . लेकिन एसपी साहब ने कोई जवाब नहीं दिया .तब हमने अदालत में इस अपराध के बारे में आवेदन दिया . अदालत ने इन महिलाओं के बयान रिकार्ड किये . अदालत ने इस सामूहिक बलात्कार की घटना के चश्मदीद गवाहों के बयान भी दर्ज़ किये . इसके बाद अदालत ने इन पुलिस अधिकारियों, विशेष पुलिस अधिकारियों और सलवाजुडूम के नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किये . लेकिन पुलिस ने इन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया . सरकार ने अदालत में इन्हें फरार बताया . लेकिन ये बलात्कारी नई लड़कियों से बलात्कार करते रहे . आदिवासियों के नए नए गावों को जलाते रहे .सरकार इन्हें लगातार तनख्वाह देती रही .
मैं दिल्ली आया, मैंने गृह मंत्री पी चिदम्बरम से मिलकर उन्हें दंतेवाड़ा आकर आदिवासियों से मिलकर उनकी तकलीफें सुनने का आग्रह किया . मैंने पी चिदम्बरम को एक सीडी सौंपी जिसमे इन लड़कियों के बयान भी थे . मैं दंतेवाड़ा वापिस पहुंचा तो पुलिस के बड़े दल ने जाकर इन लड़कियों का अपहरण कर लिया और दोरनापाल थाने में लाकर इन लड़कियों के साथ पांच दिन तक दोबारा बलात्कार किया . और इसके बाद इन लड़कियों को गावों में लाकर वापिस फेंक दिया और चेतावनी दी कि अबकि बार अगर इन लड़कियों ने मूंह खोला तो पूरे गाँव को आग लगा दी जायेगी .
हम इस मामले में लिखा पढ़ी करते रहे . सरकार ने परेशान होकर बलात्कारियों से कहा कि इन लड़कियों को अदालत में ले जाकर मुकदमा खत्म करवाओ . पिछले महीने ये बलात्कारी इन लड़कियों को जीप में डाल कर अदालत में ले गये . अदालत ने बयान दर्ज किया कि इन महिलाओं के साथ कभी बलात्कार नहीं हुआ , यह महिलायें इससे पहले कभी पुलिस के पास शिकायत करने नहीं गई , यह महिलायें कभी किसी अदालत में नहीं गई , इन महिलाओं में कभी किसी जज के सामने बयान नहीं दिया .
अदालत ने यह नहीं पूछा कि जो बयान महिलाओं ने पहले जज के सामने दिया था क्या महिलाओं का वह बयान जज ने अपनी कल्पना से लिख लिया था . अदालत ने यह भी नहीं पूछा कि इन लड़कियों को बलात्कारी अपनी साथ लेकर कैसे आये हैं ?
कुछ महीने पहले इनमे से एक बलात्कारी पुलिस वाले की मौत हो गई . इस पुलिस वाले की मूर्ती दोरनापाल नगर में लगाई गई है . पुलिस के एसपी ने इस मूर्ती का अनावरण किया इस कार्यक्रम में अन्य बलात्कारी भी शमिल हुए . जब एसपी से हिन्दू अखबार के संवाददाता ने पूछ कि इस व्यक्ति के ऊपर तो बलात्कार का आरोप था फिर आप इसकी मूर्ती लगाने के कार्यक्रम में कैसे शामिल हो सकते हैं ? तो पुलिस अधीक्षक ने जवाब दिया कि नहीं मैंने कुछ गाँव वालों से इस मामले के बारे में पूछ था और मुझे उन गाँव वालों ने बताया कि इन लड़कियों ने सलवा जुडूम को रोकने के लिये पुलिस वालों पर बलात्कार का झूठा इलज़ाम लगाया है .
वाह , अब पुलिस पीड़ित लड़कियों से नहीं मिलगी .अब पुलिस का एसपी बलात्कार के मामले में मुहल्ले वालों से उनकी राय मांगेगा .और पूछेगा कि इस बलात्कार के मामले में मुहल्ले वालों की क्या राय है ? और फिर पुलिस का एसपी खुद ही अदालत भी बन जाएगा . वह बलात्कारियों को बेगुनाह भी मान लेगा . बल्कि वह बलात्कारियों को प्रोत्साहित करेगा कि वे लोग पीड़ित महिलाओं को जबरन अपनी जीप में डाल कर अदालत ले जाएँ और उनसे मनमाना बयान दिलवा लें. क्यों कि एस पी के विचार में यही देशभक्ति है . वह एसपी साफ़ साफ़ बयान दे रहा है कि क्योंकि यह महिलाए सलवा जुडूम को रोकने के लिये पुलिस वालों पर ' झूठा ' आरोप लगा रही हैं इसलिये इनकी बात कैसे सुनी जाय ?
यह बिल्कुल वैसा ही है कि जैसे दिल्ली में दामनी कांड में पुलिस यह कहे कि यह लड़की तो कम्युनिस्ट थी और यह कांग्रेस सरकार को बदनाम करने के लिये झूठा आरोप लगा रही है . और फिर पुलिस इन छहों बलात्कारियों से कहे कि अब बलात्कारी इस लड़की के परिवार वालों को पकड़ कर अदालत में ले जाएँ और जज के सामने परिवार वालों से अपने मन का बयान दिलवा लें .
इस नोट के नीचे पिछले जज द्वारा की गई कार्यवाही का एक पेज लगा रहा हूं . अगर यह लड़कियां कभी कोर्ट नहीं गई थी तो अदालत का यह कागज कहां से आया . या तो पिछला जज झूठ बोल रहा है या नया वाला .
भयानक है यह सब . कोई इन लड़कियों का साथ नहीं दे रहा है . मन बहुत बेचैन है . किसके पास जाएँ अब ?
अगर आदिवासियों के साथ ये सब होगा ! आदिवासियों को भारत के लोकतंत्र , न्याय प्रणाली , व समानता का अनुभव अगर नहीं होगा ! उनकी बेटियों के साथ बलात्कार करने पर अदालतें भी सामान्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं करेंगी तो आदिवासियों के पास अपने सम्मान व जीवन की रक्षा करने का क्या रास्ता बचता है ? अगर हमने आज इन प्रश्नों से मुंह चुराया और आदिवासियों को भारत के संविधान में लिखे गये समता व् न्याय से वंचित रखा ! उनके द्वारा उठाई गई न्याय की गुहार को बंदूक से ही दबाया तो मुझे भय है कि आदिवासियों का एक बड़ा तबका ये मानने लगेगा कि ये व्यवस्था उन्हें न्याय दे ही नहीं सकती ! तथा ये स्तिथी हमारे राष्ट्रीय जीवन में अशांति का कारण बन सकती है !
क्या कहीं कोई सुन रहा है ?
PRESS RELEASE- #Vaw in India Protesters Demand Justice for victims and punishment for perpetrators
Posted: March 13, 2013 in ankit garg, chhattisgarh, SONI SORI, Supreme Court, torture, Women rightsTags: adivasi, Chhattisgarh, Communist Party of India (Maoist), India, Jagdalpur, maoism, New Delhi, New Jersey, soni sori, Sori, Telangana Development Forum, women rights
New Jersey, March 13, 2013 -Against a background of everincreasing
reports of rape and other violence on women in India, several individuals including the NJ chapter members from Association For India Development ,
People For Loksatta , India Against Chapter, Telangana Development Forum gathered on Friday,
March 8th, in Oak Tree Road, New Jersey to stand in solidarity with victims and survivors of
gender violence in India. Given the growing outrage in India as a result of the recent rape case in
Delhi, the protestors wanted to raise awareness and express anger against the alarming
incidence of violence. This event marked special mention of Soni Sori, an adivasi school teacher
currently held in the Central Jail in Jagdalpur, Chhattisgarh, India. Similar protests have also
been organized in other cities including Boston, London and several cities in India on the
ocassion of the International Women's Day on March 8th. Soni Sori has been the symbol of
global protests in the past due to the custodial rape and torture she had to face from the jail
authorities.
Sori was arrested in New Delhi on October 4, 2011 and accused of being a Maoist supporter.
Despite her appeals to cowaurts in New Delhi, she was handed over to the Chhattisgarh police
and taken to the state where she was beaten, sexually assaulted and given electric shocks by
the police. Sori documented her torture in letters she wrote to her lawyer, and which have since
been widely publicized.
A petition in support of Soni Sori was read out by Suresh Ediga, the organizer of the event. The
petition was then signed by all the participants and a copy of the same would be handed over to
the Indian Embassy in New York in the coming days. They then took out a silent march in an
effort to create more awareness about Soni Sori and her fight for justice. Each one of the
participants recorded a 10 second video in support of Soni Sori, as part of the One Billion rising
for Soni Sori. It is noteworthy to mention that Sori has been acquitted in four out of the eight
cases in which she was charged.
Participants also took part in an impromptu discussion and discussed among the other things
why Soni Sori should matter, why tribal issues in remote villages of Chattisgarh should matter
and how citizens can play an active role in bringing transparency and accountability in
governance? Organizers assured that this is just one in a many series of actions to speak
against the injustice and violence that women face on a daily basis.
Pica Avilable here-https://www.facebook.com/media/set/?set=a.10152675593270192.1073741827.859825191&type=1&l=167eff96d5
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BOSTON: WRise, a women-led group to engage the broader community through reflection and action around gender issues, held its inaugural event in the Right to Be Series at Massachusetts Institute of Technology (MIT), on March 3rd.
WRise holding its inaugural event at Massachusetts Institute of Technology on March 3rd. Photo credid: WRise-Boston and Zainab Lakhani
The discussion opened dialogues on issues of custodial rape, state-supported violence against women in geo-politically sensitive areas, and problems of accessing justice through the case of Soni Sori, a tribal woman from Chattisgarh, India.
Shilpi Suneja, a writer in the Boston-area, presented a moving piece juxtaposing how Soni Sori is perceived by theIndian state against her identity as a woman, mother, and survivor of brutality. She addressed the issue of "gallantry," against the background of "Gallantry Awards" being award by the Indian state to police officials like Ankit Garg, accused of torturing and abusing Soni Sori.
Shwetika Kumar, an electrical engineer, provided a concise yet effective background on the context of the conflict in Chattisgarh, the Naxalite movement in India, the vigilante-group Salwa Judum and the Indian state's role in the conflict.
Chhavi Goenka, a PhD student at Boston University, spoke about the implementation of the Justice Verma Committee Report, which was submitted on January 23rd to suggest ways to make rape laws stronger in India in response to the gruesome gang rape of a young woman in Delhi on December 16. The event was moderated by Pronita Saxena, active in social justice issues in the Boston area.
Over 60 people, women and men, attended the event, including members of Women Fight Back (WFN), Chelsea Uniting Against the War, the Bolivarian Circle of Boston, and Association for India's Development (AID). During the latter half of the event, there was a lively discussion and dialogue among attendees about systems of patriarchy, domestic violence, the double standard between media and acceptable conduct for women on the streets in India, and suggestions for future collaborations.
The group invited attendees to seek justice for Soni Sori through the "Take back the President's Police Medal of Gallantry awarded to Ankit Garg" petition at the venue.
WRise's discussions are open to the community and held every other Saturday at noon in Cambridge, MA.
The online petition can be found at:
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