Friday, June 8, 2012

दो महीने के उत्पाती अखिलेश

दो महीने के उत्पाती अखिलेश



अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रदेश आरोपों-प्रत्यारोपों की धुरी पर घूम रहा है। सरकार कुछ कर रही है तो वह है पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों की ट्रांसफर, पोस्टिंग और पूर्ववर्ती सरकार की शुरू की गयी दर्जनों योजना बंद कराने का काम...

अजय प्रकाश 

'दो महीने के भीतर उत्तर प्रदेश में आठ सौं हत्याएं हो चुकी हैं. अपहरण, डकैती, छिनैती और हत्याओं के दौर-दौरे से आम जनता उकता चुकी है. अगले पांच सालों में जनता को अपने फैसले पर और पछताना पड़ेगा.' दिल्ली में आयोजित हुई एक प्रेस वार्ता में प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश की नयी सपा सरकार पर आरोप लगाया. जवाब में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, 'मायावती पहले अपना गिरेबां झांके.'

akhilesh-yadav-chief शासन में सपा को सरकार आये कुछ ही महीने  हुए हैं. इस दौरान राज्य में बलात्कार, लूट, हत्या और अत्याचारों की खबरों का पूरे प्रदेश में शोर है. उधर सपा सरकार मायावती की सर्वजन सरकार में हुए घोटालों की फाइलें बताकर खूब सनसनी बटोर रही है. बकौल मुख्यमंत्री, 'मायावती सरकार ने नोएडा और लखनउ में बनवाई मूर्तियों और पार्कों में करीब 40 हजार करोड़ का घोटाला किया है.' 

इस मामले की जांच कर रही लखनऊ पुलिस के प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सरकारी संपत्ति का 300 करोड़ हाथियों की मूर्तियों में, 200 करोड़ कांशीराम ईको पार्क और 150 करोड़ फार्म हाउस स्कीम में लगा है. सरकार इस मामले की जांच स्पेशल इंवेस्टिगेटिव टीम से कराने की तैयारी में है. मायावती ने इस जांच को पूर्वाग्रह ग्रस्त बताया और कहा, 'बदले की कार्यवाही से बाज आयें मुख्यमंत्री.' 

अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रदेश आरोपों-प्रत्यारोपों की धुरी पर घूम रहा है. अगर सरकार कुछ कर रही है तो वह है पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों की ट्रांसफर, पोस्टिंग और पूर्ववर्ती सरकार की ओर से शुरू की गयी दर्जनों योजना बंद कराने का काम. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के मुताबिक, 'सपा सरकार में अधिकारियों का ट्रांसफर अब एक उद्योग है.'

 

dr-ayub-peace-partyलूट में समाजवाद ला रहे अखिलेश : डॉ अयूबपीस पार्टी अध्यक्ष

उत्तर प्रदेश में नयी सरकार बनने के बाद राज्य में हालात कैसे हैं?
चुनाव परिणाम आने के बाद से जैसी आशंका थी सरकार उसी राह पर है. प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल की लंपट परंपरा को ही आगे बढ़ा रहे हैं. तमाम दावों और आश्वासनों के बावजूद पिछली सपा सरकारों में होने वाली गुंडई पर वे रोक नहीं गला पा रहे.
लेकिन अभी तो सरकार बने तीन महीने भी नहीं हुए हैं, ऐसे में अखिलेश को मुलायम का मुख्यमंत्री बताना उचित है?
यह बात ठीक है. राज्य में कानून-व्यवस्था, जनसुविधाओं और सपा के चुनावी वायदों के मद्देनजर गौर करें तो अखिलेश सभी मोर्चों पर फेल दिख रहे हैं. जिस सरकार की शुरूआत बलात्कार, लूट और सपा के गुंडों के अत्याचारों से हुई हो उसके भविष्य का अंदाजा लगाने में पांच साल का इंतजार बेमानी है.  
ऐसी स्थितियां तो पूर्ववर्ती मायावती सरकार में भी थीं?
मायावती सरकार के दौरान सड़कों पर गुंडागर्दी नहीं थी और आम जनता में भय का वह माहौल नहीं था, जैसा अखिलेश की पार्टी के लोग आज दिखा रहे हैं. मायावती के शासन में गुंडई बड़े लोगों के बीच थी, जिसका अब चैक-चैराहों तक विस्तार हो गया है. मायावती संस्थाबद्ध तरीके से लूटती थीं जबकि अखिलेश लूट में समाजवाद लाकर वही कर रहे हैं. 
सुधार की कोई गुंजाईश? 
मजबूत इच्छा शक्ति की सरकार हो तो कोई काम मुश्किल नहीं. अखिलेश को पहला काम यह करना होगा कि बयान देने की बजाय अपने लंपट समर्थकों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही करें. अधिकारियों और नेताओं के माफिया गठजोड़ का बंधन तोड़ें, अपने को सरकार समझने वाले कार्यकर्ताओं को पार्टी से बेदखल करें और चमचों की जगह काम करने वाले नौकरशाहों को प्रशासनिक निर्णय में भागीदार बनायें.  

सरकार ने कुछेक जांचों जैसे चर्चित पुलिस भर्ती घोटाला की जांच भी बंद करने का निर्णय लिया है. सन् 2005-2006 में सपा सरकार ने 18 हजार जवानों की भर्ती पुलिस में की थी. इनमें सिपाही, पीएसी और रेडियो वायरलेस ऑपरेटर शामिल थे. सन् 2007 में सत्ता में आयी बसपा सरकार अनियमितता के मद्देनजर भर्ती को रद्द कर दी और जांच बिठा दी. मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है. जांच वापस लेने के साथ ही सरकार ने उन 130 आइपीएस और पीपीएस अधिकारियों को बख्श दिया है जिनपर भर्ती में हुई अनियमितता के आरोप थे. 

सरकार ने मायावती की शुरू की गयी 27 योजनाओं और कार्यक्रमों को बंद कर दिया है. 30 जून 2009 से सरकारी ठेकों में दलितों और आदिवासियों को दिये जाने वाले आरक्षण को भी 11 मई को हुई कैबिनेट की बैठक में अखिलेश यादव ने रद्द कर दिया. सरकार के मुताबिक बंद की गयी योजनाओं से 4861.27 करोड़ रूपयों की बचत होगी. इन्हें विकास के दूसरे बुनियादी कार्यक्रमों में खर्च किया जायेगा. बंद की योजनाओं में मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना, महामाया गरीब बालिका आशिर्वाद योजना, महामाया आवास योजना, सावित्री बाई फुले बालिका शिक्षा मदद योजना, अंबेडकर नलकूप योजना और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्रों को विदेश में पढ़ाई के लिए दी जाने वाली मदद मुख्य तौर पर है. 

बंद की गयी ज्यातादर योजनाएं और कार्यक्रम दलित महापुरूषों के नाम पर थीं. सरकार का कहना है कि इनमें से 13 संबंधित विभागों के पास इन योजनाओं के लिए शून्य मद था. अखिलेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा में ताज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को बनाने की योजना भी रद्द कर दी. इस एयरपोर्ट की पहली योजना भाजपा नेता राजनाथ सिंह ने 2001 में बनायी थी, जब वे प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. हालांकि इस योजना को केंद्र ने अभ्ज्ञी हरी झंडी नहीं दी थी. 

मायावती सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में राज्य की नौकरियों में एससी@एसटी को दी जाने वाली पदोन्नति भी थी, जिसे मौजूदा सरकार ने रद्द कर दिया है. हालांकि पदोन्नति में आरक्षण का मामला 27 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय में खारिज हो गया था. सन् 2008 में पदोन्नति के समय करीब 700 सौ अनूसुचित जाति के कर्मचारी इस आरक्षण से लाभान्वित हुए. उधर सपा ने यातायात पुलिस की डेªस भी बदल दी है. बसपा सरकार ने यातायात पुलिस को नीली पतलून और टोपी पहनायी थी, जिसे सपा ने पुलिस का बसपाईकरण कहा था. अब यातायात पुलिस में कुछ अधिकारियों को छोड़ शेष पुलिसकर्मियों की ड्रेस सामान्य पुलिसकर्मियों जैसी ही होगी. 

सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाने वाले अखिलेश यादव की सरकार के इन दिनों सिर्फ पलवटार में जुटी है. इस सरकार के विधायकों और नौकरशाहों के एक से बढ़कर एक किस्से सामने आ रहे हैं. 5 मई को इलाहाबाद जिले के हंडि़या पुलिस स्टेशन के सैदाबाद पुलिस चैकी के इंस्पेक्टर हरिवंश यादव को सपा विधायक महेश नारायण सिंह ने फोन कर कहा कि, 'पता है तुम्हें हंडि़या में क्यों लाया गया हो? जो मैं कहता हूं वह करो, नहीं तो जूते से मारूंगा.' इस मामले में दिलचस्प यह रहा कि इंस्पेक्टर ने विधायक की धमकी उनके फोन नंबर समेत रोजाना डायरी में दर्ज की. 

प्रदेश में कानून व्यवस्था की हालत यह है कि हर रोज हर जिले में कम से कम चार हत्या हो रही है. बलात्कार, छिनैती, अपहरण के आंकड़े भी लगातार बढ़ रहे हैं. बसपा प्रमुख मायावती के मुताबिक पिछले दो महीनों में 8 सौ हत्यायें, 270 बलात्कार, 256 अपहरण और 720 लूट की घटनायें हुई हैं.' 

राज्य में हर कहीं बिजली का संकट बढ़ता जा रहा है. हर रोज किसी ने किसी जिले से बिजली को लेकर अधिकारियों, पुलिस और उपभोक्ताओं में झड़पें हो रही हैं. सपा के घोषणा पत्र में छपे तमाम वायदों को भी पूरा करने की मांग को लेकर सड़कों पर जनता उतर रही है. बेराजगारी भत्ता देने का मामला राज्य सरकार के लिए फांस बन गया है. सरकार न देने की स्थिति में हैं और न इनकार की हालत में. हर मोर्चे पर सरकार की असफलता की खबरों के बीच 24 जून को उन्नाव लोकसभा सीट पर चुनाव होने हैं, जिसमें सपा को सफल होने की जुगत भी करनी है. यह सीट अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई है. 

ajay.prakash@janjwar.com

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